Delhi High coartनयी दिल्ली,  राजधानी में प्रदूषण को नियंत्रित करने के मकसद से दिल्ली सरकार द्वारा निजी वाहनों को सम विषम नंबर के अनुसार वैकल्पिक तिथियों में चलाने की अनुमति के फैसले पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज रोक लगाने से इंकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायाधीश जयंत की खंडपीठ ने रोक लगाने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार का यह फैसला “परीक्षण आधार” पर है। इस मामले पर अगली सुनवाई 23 दिसंबर को होगी।

दिल्ली सरकार ने एक जनवरी से परीक्षण के तौर पर निजी कारों को सम विषम नंबर के आधार पर वैकल्पिक तिथियों में चलाने का फैसला किया है। उसके इस फैसले को लेकर खासी चर्चा हो रही है और इस निर्णय पर रोक लगाने के लिए सोमवार को अधिवक्ता श्वेता कपूर ने जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर आज सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने हस्तक्षेप से मना करते हुए रोक लगाने से इंकार कर दिया।

खंडपीठ ने “इसे अपरिपक्व बताया, सरकार लोगों के साथ विचार विमर्श कर रही है फैसला एक जनवरी से परीक्षण के तौर पर लागू किया जायेगा। अभी इस पर कोई नीति और अधिसूचना नहीं आई है यह केवल एक प्रस्ताव है। याचिका केवल सरकार पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती।”
दिल्ली सरकार की तरफ से अधिवक्ता राहुल मेहरा ने याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि सरकार लोगों के साथ बातचीत कर रही है और याचिका को खारिज कर दिया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी जिसमें सम विषम नंबर वाली निजी कारों को सोमवार से शनिवार तक सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक चलाने की अनुमति का निर्णय लिया गया। रविवार को किसी प्रकार की पाबंदी नहीं रहेगी। सम विषम नंबर की निजी कारों को तिथियों के हिसाब से चलाने की अनुमति होगी। यह फैसला पीसीआर वैन और एंबुलेंस जैसी सेवाओं पर लागू नहीं होगा।

परिवहन मंत्री गोपाल राय ने बताया था कि यह निर्णय परीक्षण के तौर पर लागू किया जा रहा है और इसकी 15 जनवरी को समीक्षा की जायेगी। दुपहिया और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के वाहनों के संबंध में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस पर आगे चर्चा करने के लिए कल फिर बैठक होनी है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार प्रदूषण को रोकने के मुख्य कारण पर जाने की बजाय लोगों को असहाय छोड़ रही है। उसने लोगों को होने वाली दिक्कतों के बारे में कोई इंतजाम नहीं किया है। दिल्ली में करीब 28 लाख निजी कारें हैं और सरकार के इस फैसले से 14 लाख कारें सड़कों पर नहीं उतरेंगी। सरकार ने कहा है कि लोगों को होने वाली दिक्कतों को लेकर वह चिंतित है और इसके लिए मैट्रो रेल सेवा से फेरे बढ़ाने के साथ साथ सार्वजिनक बस सेवा को दुरूस्त करने के लिए दस हजार बसों का इंतजाम किया जायेगा।