parliamentनयी दिल्ली,  उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने के विरोध में आज कांग्रेस के जबर्दस्त हंगामे के कारण राज्यसभा में लगातार दूसरे दिन भी कामकाज नहीं हो सका और चार बार स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गयी। कांग्रेसी सदस्यों ने कल की तरह आज भी शून्यकाल तथा प्रश्नकाल को बाधित किया और भोजनावकाश के बाद भी कार्यवाही नहीं चलने दी।

भोजनावकाश के बाद कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने उत्तराखंड के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले की सदन के नेता अरूण जेटली द्वारा आलोचना किए जाने का मुद्दा उठाया और कहा कि किसी भी राज्य के विधानसभा अध्यक्ष या विधान परिषद के सभापति के फैसले की इस सदन में आलोचना नहीं की जा सकती। इस पर कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने भी नियमों का हवाला देते हुए विधानसभा के अध्यक्ष के फैसले की आलोचना करने को गलत बताया क्योंकि अध्यक्ष के फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती।

सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि श्री जेटली खुद लोकसभा अध्यक्ष के फैसले का सम्मान करने की बात कहते रहे हैं इसलिए उन्हें किसी राज्य के विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय का भी सम्मान करना चाहिए। इस पर श्री जेटली ने कहा कि जब सदन में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने पर चर्चा होगी तो उनमें उन सभी परिस्थितियों पर चर्चा होगी जिनके कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया और तब विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के गुणदोष की भी चर्चा होगी। इस पर कांग्रेसी सदस्य भड़क गए और वे सदन में नारे लगाने लगे तथा हंगामा करने लगे तब उपसभापति पी जे कुरियन ने सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

तीन बजे सदन की कार्यवाही जब शुरू हुई तो कांग्रेसी सदस्य फिर सभापति के आसन के पास आकर नारेबाजी करने लगे। इस बीच शोर शराबे में विधि मंत्री सदानंद गौड़ा ने विनियोग कानून (निरसन) विधेयक 2005 पेश किया जो लोकसभा पारित कर चुकी है। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने इस पर कड़ा एेतराज किया। उनका कहना था कि सरकार हंगामे में कोई विधेयक इस तरह न तो पेश कर सकती है न पारित करा सकती है।

संसदीय कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने उसे पारित कराने के लिए उपसभापति पी जे कुरियन ने कहा लेकिन विपक्षी सदस्यों के विरोध के कारण यह विधेयक पारित नहीं हुआ और हंगामे को देखते हुए श्री कुरियन ने सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी।

Related Posts: