अमेरिका ने उत्तरी कोरिया की हथियारों से घेराबंदी कर दी है. उसके विरुद्ध दक्षिण कोरिया के क्षेत्र में ‘थाडÓ मिसाइल सिस्टम तैनात कर दिया है. उसने युद्धपोत दक्षिण कोरिया व जापान के निकट तैनात हो गये है और तीनों देशों में इस दशक का सबसे बड़ा युद्ध अभ्यास प्रारंभ हो गया. थाड मिसाइल दुश्मन की बैलास्टिक मिसाइल को टारगेट पर हमला करने से पहले ही रास्ते में ही ध्वस्त कर देता है.

जल, थल व वायु सेनाओं की आयुध व मारक क्षमता में उत्तर कोरिया कहीं से भी अमेरिका से भिडऩे की क्षमता नहीं रखता है, लेकिन वह धमकी अवश्य दे रहा है कि उसने ऐसी इंटर-कान्टीनेन्टल बैलास्टिक मिसाइल अब विकसित कर ली है कि यदि अमेरिका ने उस पर हमला किया तो वह परमाणु बमों को पुन: मिसाइलों के जरिये अमेरिका पर दाग देगा. ऐसा अनुमान है कि उत्तर कोरिया के पास लगभग 10 से 16 तक परमाणु बम है और 5 हजार टन तक केमिकल हथियार है.

अमेरिका की ‘थाडÓ मिसाइल की तैनाती यह सुनिश्चित करने के लिये है कि यदि उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह किम यदि हिटलरी उन्माद कर ही बैठे तो उसकी मिसाइलें दागते ही खत्म कर दी जाएंगी.

संसार के सभी देश इस बात से अचंभित हैं कि युद्ध के तनाव की स्थिति तो अरब राष्ट्र सीरिया में चल रही थी. राष्टï्रपति असद के पक्ष व विरुद्ध में अमेरिका व रूस आमने-सामने आ गये थे. अमेरिका ने वहां रासायनिक हमला होते ही मिसाइलों से हमला कर दिया और रूस ने भी चेतावनी दे दी कि यदि मिसाइल हमला दुबारा हुआ तो अमेरिका को रूस से सीधा निपटना पड़ेगा.

ऐसे में एकाएक युद्धक तनाव प्रशांत महासागर में उत्तरी कोरिया ने पैदा कर दिया और अमेरिका को चुनौती दे डाली और बात यहां तक आ गई कि जंगी जहाज थाड मिसाइल तैनात हो गई और यद्धाभ्यास हो रहे हैं.

कूटनीतिक जगत की धारणा है कि उत्तर कोरिया को सामने कर वास्तव में चीन प्रशांत महासागर में तनाव की स्थिति पैदा कर उसके उन दावों पर दबाव बनाना चाहता है जो वह प्रशांत के अंतर्गत आने वाले उत्तर व दक्षिण चीन की समुद्री सीमाओं को निर्धारित करना चाहता है. प्रशांत महासागर में दुनिया के 70 प्रतिशत समुद्री व्यापारिक मार्ग हैं.

मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस, हांगकांग, उत्तर व दक्षिण कोरिया औरे जापान के साथ-साथ भारत व यूरोपीय देशों का भी बड़ा व्यापार इसी मार्ग से होता है. जापान भारत को व्यापारिक संबंधों का एक बड़ा देश है. यहां युद्ध की स्थिति कई देशों के व्यापारिक व व्यापारिक जल मार्गों को बाधित कर देगी.

वैसे एक बात तो निश्चित ही है यदि यहां युद्ध भड़का तो वह पूरी तौर पर तकनीकी युद्ध होगा और कुछ ही घंटों में निर्णायक हो जायेगा. हो सकता है इसके परिणामस्वरूप उत्तर व दक्षिण कोरिया का उसी तरह एकीकरण हो जाए जैसे जर्मनी और वियतनाम के हो चुके हैं.

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