बुरहानपुर की छवि को प्रदर्शनी के जरिए किया जीवंत

  • लोगों ने विविध व्यंजनों का लुत्फ उठाया

भोपाल, बुरहानपुर उत्सव के दूसरे दिन आज भारत भवन परिसर बुरहानपुर की कला परम्परा, इतिहास, वहां के चित्रों और स्वाद से सराबोर रहा. इस अवसर पर वहां की समृद्ध धरोहर पर लगी प्रदर्शनी और ऐतिहासिक महत्व के भवनों के बारे में कई जिज्ञासु दर्शकों ने जानकारी ली.

चार किलोमीटर लम्बे ताप्ती घाट की फोटो लोगों के आकर्षण का केन्द्र रही. फोटोग्राफर नयन कपाडिय़ा की इस फोटो के साथ ही उनकी मटकी फोड़, नमाज व शहर की अन्य गतिविधियों पर केन्द्रित फोटोज ने भारत भवन में बुरहानपुर की छवि को जीवंत कर दिया.

होशंग हवलदार की ऐतिहासिक इमारतों पर प्रदर्शनी, डॉ. मेजर एम.के. गुप्ता की बुरहानपुर क्षेत्र से मिले शुंगकालीन अवशेषों, अन्य ऐतिहासिक धातु प्रतिमाओं, सीलों, सिक्कों व मुगल टकसाल पर केन्द्रित प्रदर्शनी और शालिक राम चौधरी द्वारा कुंडी भंडारा की तकनीक का प्रस्तुतिकरण करते चित्रों ने बुरहानपुर के समृद्ध अतीत को बखूबी अभिव्यक्त किया.

उत्सव के सायंकालीन सत्र में शास्त्रीय गायन, लोक संस्कृति आधारित नृत्य और संगीत से कार्यक्रम की शुरूआत हुई. शास्त्रीय गायक तुकाराम पाटिल ने प्रस्तुति दी. उल्लेखनीय है कि पाटिल द्वारा रचित 56 सुर तरंगों को उत्तरप्रदेश के संगीत विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता दी गई है.

गायन में सीताराम चौधरी ने हारमोनियम और गोपाल पाटिल ने तबले पर संगत दी. कीर्तनकार कैलाश यावतकर तथा पण्डरीनाथ पाटिल की प्रस्तुति के साथ-साथ दिलीप कटियारे के भजन और मुकेश दरबार समूह द्वारा आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति दी गई.

कार्यक्रम में बलवंत पौराणिक ने गीतकांच तरंग और चंचल कुशवाहा ग्रुप ने गुजराती गरबा तथा अश्विनी टेमले ने मुक्ताकाश मंच पर रंगारंग प्रस्तुति दी.उत्सव के अंतर्गत आयोजित आनंद मेला में बुरहानपुर के प्रसिद्ध व्यंजनों जैसे मावा जलेबी, देग वाले दाल-चावल, वेज हलीन, मीठे चावल, निमाड़ी दाल-बाटी, बालाजी महाराज के प्रसाद दराबा, फलीदाना चटनी की सुगंध और स्वाद बहुत सराहे गये.

आज होगा कवि-सम्मेलन और मुशायरा

बुरहानपुर उत्सव के तीसरे दिन 22 नवंबर को सायं 6.30 बजे से कवि सम्मेलन, पारंपरिक नृत्य और मुशायरे का आयोजन होगा. इसके साथ ही आनंद मेला के अंतर्गत स्थानीय व्यंजन जैसे चना कचौड़ी, देग वाले दाल-चावल, मावा जलेबी, मूंगदाल, भाकर बड़ी जैसे व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकेगा.

कवि सम्मेलन में ठाकुर वीरेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र जैन भारती, वीरेन्द्र कुमार निरजा, श्याम ठाकुर, सरस्वती विस्पुते, पूर्णिमा हुंडीवाला, उज्जवला बेन कपाडिय़ा, रमेशचंद्र धुआंधार अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे.

मुशायरे में नईम अख्तर, खलील असद, जलीलुर्रमान, तब्जील ताबिश, एजाज उम्मीदी, शउर आशना, जमील असगर, अनवर माही, अहद अंसारी और ताहेर नकाश शिरकत करेंगे.

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