हाल ही में फ्रान्स की राजधानी पेरिस, भारत में पठानकोट में एयर फोर्स बेस स्टेशन के बाद इस्लामी स्टेट का तीसरा बड़ा हमला बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल के हवाई अड्डे पर आत्मघाती हमला किया गया और उसी श्रृंखला में ब्रुसेल्स के एक मेट्रो स्टेशन पर हमला किया गया. ब्रुसेल्स यूरोपीय यूनियन का मुख्यालय है. हमलों में 34 लोग मारे गये और 200 से ज्यादा घायल हुए है. इसके अलावा अफगानिस्तान और पाकिस्तान में खासकर राजधानी काबुल में विदेशी दूतावासों के इलाकों में आतंकी हमले होतेे जा रहे हैं.

ये दोनों देश अलकायदा और जैशे मोहम्मद व लश्करे तैयबा के केंद्र बन चुके है. अरब राष्टï्रों में इस्लामी स्टेट का आतंकी गढ़ इराक व सीरिया में है और उसका विस्तार अन्य अरब राष्टï्रों से हो चुका है. यूरोप में आतंकी हमले इस्लामी स्टेट कराता है. दो सगे भाईयों इब्राहीम और खालिद बकराओनी ने ब्रुसेल्स में यह आत्मघाती हमला किया. जिसमें ये दोनों मारे गये. तीसरा नाजिम लाचरोनी हमले के बाद भाग निकला और अंदाजा है कि इसने ही भागकर मेट्रो स्टेशन पर हमला किया होगा. इस्लामी स्टेट ने यह जिम्मेवारी ली है कि उसने ही पेरिस के बाद यह हमला कराया है यूरोप में उसके और हमले अभी होते रहेंगे.

अब आतंकी हमले युद्ध से भी घातक व व्यापक हो गये हैं. राष्टï्रों के परस्पर युद्ध जो विश्व युद्ध स्तर के भी रहे हैं फौजों की लड़ाईयां होती थीं- युद्ध के कारण भी होते हैं और कुछ समय बाद किसी की पराजय या युद्ध विराम से युद्ध भी सद्भाव में समाप्त होते या रोक दिये हैं. युद्ध में नागरिक ठिकानों पर हमले नहीं किये जायेेें, युद्ध भूमि में रेडक्रास भी उसका मानवीय कार्य करता है. शत्रु पक्ष के पकड़े गये सैनिकों को युद्ध बंदी का दर्जा देकर सम्मान व सुरक्षा में रखा जाता है जो बाद में उनके देशों को वापस भेज दिये जाते हैं. युद्ध में अंतरराष्टï्रीय कन्वेशनों का पालन किया जाता है.

लेकिन आतंकी हमले पीठ में छुरा भोंकने, विश्वासघात से हमला करने व अचानक हवाई अड्डïों, रेलवे स्टेशनों, व्यस्त बाजारों में किये जाते हैं जिनमें सामान्य नागरिक मारे जाते हैं. आतंकी वहशी दरिंदे होते हैं. क्रूरता का व्यवहार और औरतों पर यौनाचार करते हैं. इस्लामी स्टेट के आतंकी एक कन्या स्कूल पर हमला करके सारी लगभग 300 लड़कियों का अपहरण कर ले गये और आपस में बांट लिया या गुलामों की तरह बेच दिया. इनकी न तो कोई मांगें होती हैं और न ही कोई उद्देश्य होता है. ये इलाकों पर हावी होकर तस्करी का व्यापार चलाते हैं. इस्लामी स्टेट ने इराक पर कब्जा करके वहां से पेट्रो क्रूड का तुर्की के मार्फत व रास्ते अवैध कमाई की. अफगानिस्तान में सऊदी ओसामा बिन लादेन की दिलचस्पी वहां अफीम के व्यापार पर कब्जा करना था.

संसार में सबसे ज्यादा अफीम अफगानिस्तान में ही होती है. आतंक के विरुद्ध सजग व तैयार रहने के लिए हर समय सेना, अद्र्ध सैनिक व पुलिस व्यवस्था को अलर्ट रखना होता है. इस पर राष्टï्रों का जो खर्चा आता है वह युद्ध पर होने वाले खर्चों से बहुत ज्यादा है.

भारत में भी नक्सली घने जंगलों व खदान वाले इलाकों पर आतंक जमा कर करोड़ों रुपया की अवैध वसूली व तस्करी से कमायी कर रहे हैं. इन्हें अभी तक इसलिए खत्म नहीं किया जा सका कि इनकी कोई मांग ही नहीं है. पहले ऐसे लोग हमला कर भाग जाते थे- छुप जाते थे. अब आतंकी संगठन दुनिया भर में इलाकों पर कब्जा करके समानान्तर सरकार चलाने लगे हैं. जबरिया टैक्स वसूली से करोड़ों की कमाई व हथियार खरीदी होती है. इन्हें पकड़ में आने पर जेलों में रखना सरकारों की सबसे बड़ी भूल है.

Related Posts: