arunनयी दिल्ली, सरकार ने आज साफ शब्दों में सरकारी बैंकों को “जल्द से जल्द गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) से मुक्ति पाने” की हिदायत दी और कहा कि वे अपना बैलेंसशीट साफ करें. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां सभी सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ तिमाही समीक्षा बैठक में यह बात कही। वित्त मंत्रालय ने बैठक के बारे में बताया कि श्री जेटली ने उन्हें सरकार की तरफ से इन दिशा में पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया है।

उन्होंने कहा कि जहां भी जरूरत होगी सरकार नीतियों में सुधार के लिए तैयार है। बैठक में वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर श्री कुंद्रा वित्तीय सेवाओं की सचिव अंजुलि चुग दुग्गल तथा विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के सचिवों ने भी हिस्सा लिया। मंत्रालय ने बताया कि बैंकों ने ऋण उठाव बढ़ाने के लिए उठाये गये विभिन्न कदमों की चर्चा की। आरबीआई द्वारा रेपो दरों में की गयी कटौती का लाभ ग्राहकों को देने के मुद्दे पर भी बात हुई और कहा गया कि बैंकों ने भी अपनी आधार दरों में खासी कटौती की है।

परिसंपत्ति की गुणवत्ता पर बैंकों ने इसे सुधारने के लिए उठाये गये कदमों से अवगत कराया। मंत्रालय के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में कृषि ऋण उठाव 48.25 लाख करोड़ रुपये रहा है और लक्ष्य का 58 प्रतिशत हासिल कर लिया गया है। श्री जेटली ने बैंकों से ऋण देने में 20 प्रतिशत और खातों की संख्या में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने को कहा। हाउसिंग लोन में 18.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी की सराहना की गयी और कहा गया कि बैंक प्राथमिक क्षेत्र के लिए आवास ऋण में भी बढ़ोतरी करें।

इसके अलावा प्रधानमंत्री जनधन योजना की भी समीक्षा की गयी। बैठक के बाद वित्त मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि कुछ बैंकों का एनपीए का स्तर अस्वीकार्य है तथा इसके लिए ऊर्जा, इस्पात तथा हाइवे सेक्टर में सुधार के प्रयास किये जा रहे हैं, जिनके पास बैंकों के एनपीए का सबसे बड़ा हिस्सा है। जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों के बारे में उन्होंने कहा कि बैंकों काे उन पर कार्रवाई करने का पूरा अधिकार तथा पर्याप्त स्वायत्तता है।