चंडीगढ़,

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के प्रबंध निदेशक (रिटेल एवं डिजिटल बैंकिंग) पी़ के. गुप्ता ने आज कहा कि केंद्र सरकार के प्रस्तावित फाईनेंशल रेजॉल्यूशन डिपॉजिटर्स इंश्योरेंस (एफआरडीआई) विधेयक से कम से कम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जर्माकर्ताओं को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और उनके हित पूर्णतया सुरक्षित हैं।

बैंक के चंडीगढ़ और पंचकूला में वैल्थ मैनेजमेंट हब ‘एसबीआई एक्सक्लूसिव’ का उद्घाटन करने के बाद श्री गुप्ता ने एक विशेष बातचीत के दौरान एक सवाल पर यह जानकारी दी।उन्हाेंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ज्यादातर हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है।ऐसे में इनके खाताधारकों या जमाकर्ताओं की जमा पूंजी पूर्णतया सुरक्षित है।

रिजर्व बैंक के बैंकों से रेट कट का फायदा ऋणधारकों तक पहुंचाने के अनुरोध को लेकर सवाल पर उन्हाेंने कहा कि उनके बैंक ने रेट कट का पूर्ण फायदा अपने ग्राहकों को पहुंचा दिया है।बैंक के जिन ग्राहकों ने पुरानी आधार दरों पर ऋण लिये थे उन्हें भी सूचित कर उनके ऋणों के पुनर्निर्धारण की पेशकश की गई है तथा नये ऋण घटी ब्याज दरों पर ही जारी किये जा रहे हैं।

विमुद्रीकरण से बैंकों के कारोबार पर हुये असर को लेकर सवाल पर श्री गुप्ता ने स्वीकार किया कि क्रेडिट ग्रोथ में कुछ गिरावट आई है क्योंकि मांग कम है।

खुदरा ऋणों की मांग और ग्रोथ तो ठीक चल रही है, लेकिन कॉर्पोरेट जगत में ऋण की मांग अभी भी कम है और इसका मुख्य कारण यह है कि अर्थव्यवस्था में धीमापन आना है।

जैसे-जैसे इसमें सुधार होगा कॉर्पोरेट ऋणों की मांग में भी इजाफा होगा और इससे बैंक क्रेडिट ग्रोथ भी बढ़ेगी।बैंक की विस्तार योजनाओं को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि विस्तार के बजाय इस समय मुख्य ध्यान छह सहयोगी बैंकों के विलय की प्रक्रिया पर केंद्रित है।जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी बैंक की शाखाओं की संख्या में भी इजाफा किया जाएगा।

एक सवाल पर उन्होंने कहा कि विमुद्रीकरण के बाद बैंकों में बड़ी मात्रा में पैसा जमा हुआ और इससे तरलता बढ़ गई, लेकिन अब जैसे-जैसे जमाकर्ता अपना पैसा निकाल रहे हैं वैसे तरलता के स्तर में भी गिरावट आ रही है।

आरबीआई ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुये कहा है कि आने वाले कुछ महीनों में तरलता की स्थिति न्यूट्रल हो जाएगी।

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