चंडीगढ. सितंबर के तीसरे सप्ताह में मॉनसून के फिर सक्रिय होने से धान की फसल को ज्यादा मदद मिलने के आसार नहीं हैं क्योंकि इसे बहुत अधिक पानी की जरूरत होती है। धान की फसल पर पडऩे वाले वास्तविक असर का आकलन अक्टूबर के पहले सप्ताह के बाद ही हो सकेगा, लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर मॉनसून अक्टूबर में वापसी से पहले तक सक्रिय नहीं रहा तो देश में धान का उत्पादन पिछले साल से 5 फीसदी कम रह सकता है।

हालांकि इन चिंताओं के बावजूद भारतीय खाद्य निगम ने इस खरीफ सीजन के लिए खरीद का लक्ष्य 3 करोड़ टन तय किया है, जबकि पिछले साल इस सीजन की वास्तविक धान खरीद 2.8 करोड़ टन रही थी। फसल वर्ष 2014-15 में रबी सहित एफसीआई की कुल खरीद 3.2 करोड़ टन रही थी। कटक स्थित चावल अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों के मुताबिक पूर्वी भारत विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में चक्रवाती तूफान से उत्पादन बढ़ सकता है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति ठीक नहीं है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे सिंचाई की सुविधाओं वाले राज्यों से कुछ मदद मिल सकती है। शेष राज्य मॉनसून के शुरुआती महीनों में कम बारिश के कारण 100 फीसदी बुआई का लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाए। अक्टूबर मेंं मॉनसून ठीक रहने से पूर्वी राज्यों में लंबी अवधि की धान की किस्मों से बेहतर उत्पादन हो सकती है।

कृषि मंत्रालय द्वारा इस महीने की 16 तारीख को जारी 2015-16 खरीफ सीजन में उत्पादन के पहले अग्रिम अनुमानों के मुताबिक खरीफ चावल का उत्पादन 9.06 करोड़ टन अनुमानित है, जो पिछले पांच वर्षों के औसत उत्पादन से 9.8 लाख टन ज्यादा था। भारतीय खाद्य निगम ने खरीफ विपणन सीजन 2015 में 3 करोड़ टन चावल की खरीद का अनुमान जताया है। अनुमानित उत्पादन और खरीद पिछले साल से 20 लाख टन अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है, लेकिन मौसम की स्थितियों के आधार पर इसमें घटत-बढ़त हो सकती है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अगेती किस्मों के धान की खरीद 1 अक्टूबर से शुरू हो जाएगी। खरीफ विपणन सत्र 2014 में एफसीआई 2.8 करोड़ टन खरीद करने में सफल रहा था।

Related Posts: