ट्रेनिंग को बताया महत्वपूर्ण एवं उपयोगी

नवभारत न्यूज भोपाल,

राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मंगलवार को बंगलादेश से आये 40 न्यायाधीशों के दूसरे दल ने फारेंसिक मेडिसिन एव टॉक्सीकोलॉजी विभाग में प्रशिक्षण लिया. यहां पर न्यायाधीशों ने ट्रेनिंग सेशन में भाग लिया एवं मोरचुरी परिसर का दौरा किया.

नेशनल ज्यूडिशियल अकादमी भोपाल और एम्स भोपाल के बीच तकनीकी सहयोग अकादमी के निदेशक के प्रयासों से शुरू किया गया है. इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में बंग्लादेश से आये न्यायाधीशों ने बहुत रुचि दिखाई एवं अपना-अपना ज्ञान बढ़ाया.

फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सीकोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर अरनीत अरोरा ट्रेनिंग प्रोग्राम की कोआर्डिनेटर थीं और नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी भोपाल के डॉ. अमित मेहरोत्रा और डॉ. शिवराज हच्चानवर वहां की ओर से कोआर्डिनेटर थे. उप निदेशक संतोष सोहगौरा, डीन शैक्षणिक डॉ. राजेश मलिक ने सत्र की अध्यक्षता की.

डॉ. जयंती यादव, एडिशनल प्रोफेसर फोरेंसिक विभाग ने ऑटोप्सी प्रोटोकाल और ओपिनियन पर एक सत्र प्रस्तुत किया जिसे बंगलादेशी न्यायाधीशों ने बहुत जानकारीपूर्ण और आकर्षक बताया साथ ही फोरेंसिक विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र बिदुआ ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया. जिसमें उन्होंने न्यायाधीशों को समाज में विश्वास, सत्य, न्याय और संविधान की रक्षा करने वाला बताया.

फोरेंसिक विभाग की प्रमुख डॉ. अरनीत अरोरा, डॉ. जयंती यादव, डॉ. राघवेंद्र कुमार बिदुआ, डॉ. वन्दा पटेल, डॉ. चिन्मय के. कामत, योगेश गौतम, अनीता यादव, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. मनीष मुकाती ने पूरी ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक देने का कार्य किया.

ट्रेनिंग सेशन को बंगलादेशी न्यायाधीशों ने बहुत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी बताया. ज्ञात हो कि 6 वर्षों से बगलादेश से 1500 न्यायाधीश भारत फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सीकोलॉजी विभाग एम्स में ट्रेनिंग लेने आते हैं, जिनमें 40 न्यायाधीश नवंबर माह में आ चुके हैं और 40 वर्तमान में आये हैं.

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