नयी दिल्ली,  राजधानी के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से समीप स्थित जयप्रकाश नारायण ट्रामा सेंटर को जोड़ने वाले भूमिगत मार्ग के खुल जाने के साथ ही अब मरीजों और डाक्टरों को बहुत सहूलियत होगी।

भूमिगत मार्ग के खुल जाने से आपात स्थिति में गंभीर हालत वाले मरीजों के अलावा डाॅक्टरों और एंबुलेंस गाड़ियों को एम्स से ट्रामा सेंटर तक पहुंचने में अब सिर्फ दो मिनट का समय लगेगा।

एम्स के अधिकारियों के अनुसार अभी तक यदि किसी मरीज को एम्स से ट्रॉमा सेंटर शिफ्ट करना होता था तो उसे रिंग रोड, सफदरजंग अस्पताल और भीकाजी कामा प्लेस से होते हुए ट्रॉमा सेंटर तक ले जाने में 30 मिनट का समय लग जाता था लेकिन भूमिगत मार्ग के जरिए अब महज दो मिनट में ट्राम सेंटर पहुंचा जा सकेगा। फिलहाल इसे परीक्षण के तौर पर खोला गया है।

भूमिगत मार्ग में एंबुलेंस और डॉक्टरों के वाहनों के अलावा मरीज व परिजनों के पैदल चलने का भी रास्ता बनाया गया है। इस भूमिगत मार्ग का मकसद जरूरतमंद मरीजों को फायदा पहुंचाना है।

दुर्घटना या आपात स्थिति वाले मरीजों और एंबुलेंस गाड़ियों के लिए इसका इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा इसलिए इस मार्ग पर व्यावसायिक वाहनों को चलने की अनुमति नहीं दी गई है। यह मार्ग 24 घंटे खुला रहेगा।

करीब ढाई मीटर चौड़े और 614 मीटर लंबे इस भूमिगत मार्ग से स्ट्रेचर और एंबुलेंस गाड़ियां आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर आ जा सकती हैं। इस मार्ग पर दो निकास द्वार भी बनाए गए हैं। यह खासतौर से चिकित्सकाें के इस्तेमाल के लिए बनाए गए हैं।

राजगढिया और सफरदरजंग अस्पताल के पास बने ये निकास द्वार चिकित्सकों के आवासीय परिसर को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं जिससे जरूरत पड़ने पर चिकित्सक तुरंत एम्स या ट्रामा सेंटर पहुंच सकें।

चालीस करोड़ की लागत से तैयार इस भूमिगत मार्ग का निर्माण दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने किया है। यह परियोजना 2012 में शुरू की गई थी।

इसका निमार्ण 2015 के मध्य में ही पूरा हो जाना था लेकिन नगर निकायों से इस मार्ग के प्रवेश द्वाराें को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए आवश्यक अनुमति हासिल करने में हुई देरी की वजह से यह परियोजना तय समय पर पूरी नहीं की जा सकी और इसमें दो साल की देरी हो गई।

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