parrikar1नयी दिल्ली,   दक्षिण पूर्वी एशिया के समक्ष आतंकवाद को सबसे गंभीर चुनौती बताते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज एशियाई देशों से आग्रह किया कि वे आतंकवादी नेटवर्कों की पहचान करके उन्हें नष्ट करने में पूरे मनोयोग से सहयोग करें। आसियान देशों के रक्षा विश्वविद्यालयों के प्रमुखों के 20वें क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री पर्रिकर ने कहा कि आतंकवाद आसियान के लिये अब भी एक गंभीरतम चुनौती है।

हाल के वक्त में आतंकवाद की घटनाओं में वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि गैर पारंपरिक खतरों से पूरे क्षेत्र में गंभीर चुनाैती खड़ी हो गयी है जिसका पूरी संकल्पशक्ति से विरोध करना होगा और किसी राज्य की नीति के रूप में प्रयोग को वैधता को खारिज करना होगा। उन्होंने कहा कि समुद्र हमारी आर्थिक समृद्धि का बड़ा कारक हो सकता है जिस पर उतने ही बड़े खतरे भी हैं।

उन्होंने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप नौवहन, हवाई परिवहन और कारोबार की स्वतंत्रता का समर्थक रहा है। दक्षिण चीन सागर विवाद के बारे में उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि देशों को अपने विवादों का शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहिये ना कि बल प्रयोग या धमकी देकर।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ना केवल अपनी जमीनी और समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिये प्रतिबद्ध है बल्कि क्षेत्र के अन्य देशों के लिये अपनी क्षमताओं को उपलब्ध करायेगी। इस तीन दिन के सम्मेलन में 23 देश हिस्सा ले रहे हैं जिनमें चीन, जापान, फिलीपीन्स, विएतनाम, रूस, यूरोपीय संघ और आसियान सचिवालय शामिल है।

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