केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक को निर्देश जारी किया है कि वह देश में ए.टी.एम. व्यवस्था की समीक्षा करें और उनमें आ रही रुपयों की कमी को रोकने के लिये उस समस्या का निदान करें.

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि उसे जानकारी हो रही है कि देश में 15 प्रतिशत ए.टी.एम. खराब बने रहते हैं. बड़े शहरों के ए.टी.एम. को तो जल्दी ठीक कर दिया जाता है लेकिन छोटे नगरों व ग्रामीण क्षेत्रों में वे कई दिनों तक उपेक्षित खराब पड़े रहते हैं. रिजर्व बैंक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ए.टी.एम. प्रणाली सभी जगहों पर बिलकुल ठीक ही चले.

ए.टी.एम. व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास कई कारणों से डिग गया है और अब लोगों ने उनमें रुपया रखने की मात्रा काफी कम कर दी है. कुछ ए.टी.एम. छोड़ रहे हैं. ए.टी.एम. में दो तरह के अपराधी दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं. एक तो वे है जो ए.टी.एम. को या तो पूरी मशीन उखाड़ के ले जाते है, या उन्हें गैस कटर से काटकर रुपये निकाल लेते हैं. बंगलौर में एक बड़ी व्यस्त सडक़ पर ए.टी.एम. में शाम की भारी भीड़ के समय एक महिला पर हमला कर घायल कर उसे लूट लिया और फरार हो गये.

भोपाल में दो कॉलेज के लडक़ेे ए.टी.एम. गार्ड पर काबू कर ए.टी.एम. तोड़ रहे थे, संयोग से पुलिस गश्त आ गयी और वे पकड़े गये. साइबर क्राइम करने वाले सबसे बड़ी मुसीबत बने हैं. किसी व्यक्ति को एकाएक एस.एम.एस. आ जाता है कि दूर किसी शहर से उसके खाते में से हजारों रुपया निकाल लिया गया है.

भोपाल में ही एक ए.टी.एम. मशीन में डिवाइस लगाकर लोगों केे कार्ड के क्लोन बन गये और उनसे अहमदाबाद में उनके एकाउंट से रुपया निकाल लिया. पहले तो बैंक उस रुपये को देने को तैयार नहीं हुई बाद में लंबी जांच चलाते रहे तब तक लोगों का रुपया फंसा पड़ा रहा. जहां ए.टी.एम. में इतनी ज्यादा असुरक्षा हो जाए वहां लोगों का विश्वास डिग जाना स्वाभाविक है. सरकार लोगों को डिजीटल इंडिया के नशे में ढकेल रही है और वहां भारी असुरक्षा होती जा रही है.

हाल ही में मोदी सरकार आम जनता के लिए त्रासदायक विधेयक ‘फाइनेंशियल रिजोलूशन एंड डिपाजिट इंश्योरेंस बिल’ ले आयी- जिसमें प्रावधान था कि अगर कोई बैंक किसी वजह से वित्तीय संकट में फंस जाता है तो खाताधारकों के रुपयों से बैंक को दोबारा खड़ा किया जायेगा. ऐसे समय में पंजाब नेशनल बैंक का अब तक सबसे बड़ा घपला सामने आ गया. उसके बाद दूसरे बैंकों के घपले भी लगातार सामने आने लगे.

उससे यह भी जाहिर हो गया कि बड़े से बड़े बैंक भी वित्तीय संकट में आ चुके हैं जिसके लिये खाताधारक कहीं से जिम्मेदार नहीं है बल्कि वित्त मंत्रालय और भ्रष्ट्र बैंक अधिकारी जिम्मेवार हैं लेकिन उसे दोबारा खड़ा करने के लिये खाताधारकों का रुपया उसमें लगा दिया जाए और खाताधारक कंगाल हो जायेगा. शुक्र है मोदी सरकार को जनविरोध से बुद्धि आ गयी और उन्होंने वह विधेयक वापस ले लिया.

नोटबंदी से पहले देश में 17.74 लाख करोड़ रुपयों के नोट चलन में थे. इस समय 18.04 लाख करोड़ के नोट चलन में हैं फिर देश में कैश का अभाव क्यों हो रहा है. ए.टी.एम. में जिन एजेंसियों का रुपया डालना होता है उनका स्टाफ ही रुपयों की अफरातफरी कर देता है- नकली नोट डाल दिये जाते हैं.

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