गुजरात व हिमाचल प्रदेश के चुनावों में भाजपा की विजय पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

नवभारत न्यूज भोपाल,

गुजरात व हिमाचल प्रदेश में हुई भाजपा की जीत पर जब नवभारत ने आम लोगों से बात की तो मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं. किसी ने विजय को ऐतिहासिक बताया, तो कुछ ने कहा कि मोदी मैजिक चल रहा है. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भाजपा का ग्राफ प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश में गिरना इस पार्टी के लिये ङ्क्षचता का विषय है.

एम.पी. नगर में फोटो कॉपी दुकान का संचालन करने वाले रूपराम प्रजापति का कहना है कि गुजरात प्रधानमंत्री का गृह प्रदेश है. यहां उनकी विजय सभी सुनिश्चित मान रहे थे. रहा सवाल हिमाचल का तो यहां हर पांच साल में होने वाला उलटफेर एक बार फिर नजर आया है.

समाज सेविका निमिषा राजपूत का कहना है कि भाजपा की जीत हुई तथा एक ओर राज्य कांग्रेस के हाथ से निकल गया. इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद के दावेदार का चुनाव हारना महत्वपूर्ण है. इसी तरह गुजरात में सौ सीटों के दायरे में सिमटना भाजपा के लिये चिंतन का विषय है. इसके बावजूद विजय तो विजय है जो मोदी मैजिक के नाम दर्ज हुई.

शिक्षाविद् डॉ. सुषमा गजपुरे का कहना है कि भाजपा की विजय गुजरात में महज 99 सीट पर हुई. गुजरात पर सभी की नजर थी और भाजपा का दावा 150 सीट जीतने का था.

कम सीटों पर विजय मिलना भाजपा के लिये खतरे की घंटी है, जबकि कांग्रेस पिछले चुनाव के मुकाबले दोगुनी सीट पर आई है, जिसे बेहतर प्रदर्शन कहना चाहिये. हिमाचल में भी भाजपा नेता प्रेम कुमार धुमल की हार पार्टी के लिये शुभ नहीं है.

  • गुजरात चुनाव में राहुल गांधी के चमत्कारिक नेतृत्व का असर दिखाई दिया है. प्रधानमंत्री मोदी के 150 पार के विजयी रथ को गुजरात में कार्यकर्ताओं की मेहनत के सामने धराशायी होना पड़ा. यहां मोदी के ‘मैं’ यूपी दंभ की हार हुई है.
    -विवेक त्रिपाठी
    प्रवक्ता एनएसयूआई
  • गुजरात में भाजपा ने लगातार 16वीं ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. लोकतंत्र में जीत चाहे एक सीट की हो या 100 सीट की. जीत भाजपा की जनहितैषी नीतियों की हुई है. इन चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जीएसटी व नोटबंदी के फैसलों पर जनता का समर्थन यहां मिला है.
    -रूपेश दीक्षित
    पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष भेल कॉलेज
  • भाजपा का अति आत्म विश्वास यहां दिखा है. इसी कारण गुजरात में सीटें कम होती दिखी हैं. जहां से देश का प्रधान सेवक आता हो, वहां की जनता ने बीजेपी से मोहभंग होते दिखा है. सम्मानजनक बात यह रही है कि यहां बीजेपी जीत गई है.
    -हर्ष चंदेल
    विभाग संयोजक एबीवीपी
  • यह भाजपा की नहीं ईवीएम की जीत है. शुरूआती रूझानों में कांग्रेस की बढ़त थी पर अचानक बीजेपी की बढ़त ईवीएम की गड़बड़ी को उजागर करती है. वहां परिस्थितियां कांग्रेस के अनुकूल थीं. यहां चुनाव आयोग की भूमिका भी संदेहास्पद है.
    -आशुतोष चौकसे
    चिलाध्यक्ष एनएसयूआई
  • जिस प्रकार के नतीजे सामने आये उससे तो यही लगता है कि भाजपा बड़ी मुश्किल से जीती है. गुजरात चुनाव में पहली बार राहुल गांधी एक परिपक्व नेता के रूप में नजर आयेै.
    -अमित पेंडसे
  • भाजपा की हिमाचल की जीत को तो एकतरफा कहा जा सकता है, पर गुजरात के नतीजों को देख लग रहा है कि यह जीत उस तरह की नहीं है, जिस तरह की भाजपा सोच रही थी. यह कहा जा सकता है कि गुजरात में भाजपा सिर्फ नरेंद्र मोदी के कारण सत्तारूढ़ हो पाई है.
    -दीपक आर्य
    सोनागिरी, भोपाल
  • जिस तरह से न्यूज चैनलों में बताया जा रहा है कि गुजरात के शहरी क्षेत्रों में भाजपा और ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस का दबदबा रहा है. इससे कहा जा सकता है कि पाटीदार (पटेल) आंदोलन का असर देखने को मिला है. पिछले 22 सालों से सत्ता में रही भाजपा को सत्ता विरोधी लहर का नुकसान तो ज्यादा नहीं हुआ है पर सौ सीट भी न जीत पाना इस बात का संकेत है कि जनता सरकार को सचेत कर रही है.
    -रामजीवन शर्मा
    राजीव नगर, भोपाल

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