बात मध्यप्रदेश सरकार के व्यापम द्वारा संचालित पी.एम.टी. तक सीमित नहीं है. अब तो सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय प्री मेडीकल टेस्ट में भारी घपला पाया और उसकी टेस्ट परीक्षा रद्द कर दी. परीक्षा संचालित करने वाले सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेन्डरी एजुकेशन को 4 हफ्ते में फिर से पूरा टेस्ट एग्जाम कराने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने फैसले में कहा पूरी परीक्षा संदिग्ध हो गयी है और किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता. अटूट विश्वसनीयता के लिये ऐसा करना जरूरी है. 3 मई को यह परीक्षा हुई थी. अब 6 लाख 30 हजार छात्रों को पुन: परीक्षा देनी होगी.

व्यापमं घोटाले के बाद से मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की स्वयं की पी.एम.टी. बंद कर दी है और वह अखिल भारतीय पी.एम.टी. से ही मेडीकल कॉलेजों के लिये छात्र लेता है. अब वहां भी उसी तरह की घपलेबाजी हो गयी है. इसका घपला हरियाणा के रोहतक में चल रहा था. उसने वाट्सएप से मध्यप्रदेश में उज्जैन के एक गौतम को एक रात पहले ही पेपर आउट कर दिया था. 10-10 लाख के सौदों से पेपर और आन्सर कुंजी भी वाट्सएप से भेज दिये
गये थे.

यदि यही हाल रहा और देश में परीक्षाओं और शिक्षा की विश्वसनीयता संदिग्ध हो गयी तो इससे युवा वर्ग बजाय शिक्षा के प्रकाश के वह अशिक्षा व अंधकार में चला जायेगा. भारत की डिग्रियां सभी देश में और विदेशों में भी फर्जी मानी जायेगी. मध्यप्रदेश व्यापमं घोटाले में लाख रुपयों के लेन-देन पी.एम.टी. अन्य परीक्षाओं में ‘मेरिट’ में टॉप पोजीशन तक खरीद ली गयी थी.

मामला पूरे भारत में बहुत गंभीर स्थिति में पहुंच गया है. संघ लोकसेवा आयोग द्वारा संचालित अखिल भारतीय सेवाओं (आई.ए.एस., आई.पी.एस. आदि) में भी घपला हो चुका है. पटना में पेपर छपा और वहीं से लीक हो गया और दिल्ली में 1-1 लाख में बिका. फौरन परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी. अभी हाल ही में आई.ए.एस. की अकेडमी में बिहार की एक लड़की बिना सिलेक्ट हुए आई.ए.एस. की ट्रेनिंग लेने लगी थी. पंजाब के राज्य लोकसेवा आयोग के एक अध्यक्ष स्वयं अपने परिवारजनों के साथ उम्मीदवारों से रिश्वत लेकर परीक्षा में पास कराते थे. उन्हें बर्खास्त किया गया और तमाम नौकरियां रद्द की गईं. मुम्बई रेलवे भर्ती बोर्ड के चेयरमेन का लड़का परीक्षा का पेपर बेचते गिरफ्तार किया गया था. मध्यप्रदेश में व्यापमं घोटाले में प्रदेश के चौहान मंत्री मंडल के एक मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा भी घपले में जेल में है और दूसरे कई मंत्रियों पर आक्षेप लग रहे हैं.

इस वर्ष लगता है देश के मेडिकल कालेजों में प्रथम वर्ष प्रारंभ ही नहीं होगा क्योंकि आल इंडिया पीएमटी अनिश्चितता की स्थिति में आ गयी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा जरूर है कि 4 हफ्तों (एक महीना) में बोर्ड नया पीएमटी करायें. लेकिन बोर्ड का कहना है कि एक महीने में दूसरा पीएमटी कराना उसके लिये संभव नहीं है. वह सुप्रीम कोर्ट जा रहा है और व्यवहारिकता उनके समक्ष रखेगा. उसे कम से कम 4 महीने का समय चाहिये. वह अक्टूबर-नवम्बर तक ऐसा कर सकने की हालत में होगा और रिजल्ट आते आते दिसम्बर आ जायेगा.

तमाम राज्य और केंद्र स्तर पर घपलेबाजियों से भारत में शिक्षा व परीक्षाओं का सर्वनाश हो गया. उच्च शिक्षा में एडमीशन और नौकरी की परीक्षाओं में नौकरी बिक्री पर रख दी गयी है. मेरिट तक खरीदी बेची गयी. अब ऐसी हालत में किसकी मेरिट व काबलियत पर कोई संस्थान या देश विश्वास करेगा. बुंदेलखंडी कहावत है- ‘भर्रा मचा दरबार में- गधा पंजीरी खाय.’

एक एक परीक्षा, एडमीशन व नौकरी पर लाखों रुपयों की रिश्वत दी जाती है. यह भी जांच का विषय है कि लोगों के पास रिश्वत देने के लिए इतना रुपया कहां से आया और इसके अलावा उनके पास और कितना है.

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