उज्जैन ,  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को धार्मिक नगरी उज्जैन से शुरू हुई एकात्म यात्रा के शुभारंभ पर कहा कि ओंकारेश्वर में आदिशंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित कर उनके योगदान को चिरस्मरणीय बनाया जायेगा।

ओंकारेश्वर वेदान्त दर्शन के अदभुत केन्द्र के रूप में स्थापित होगा। समाज ठीक दिशा में चले इसलिये सन्तों के नेतृत्व में आदिशंकराचार्य के अद्वैतवाद का प्रचार-प्रसार किया जायेगा। आद्य शंकराचार्य प्रतिमा के लिए धातु संग्रहण एवं जनजागरण को लेकर उज्जैन से एकात्म यात्रा की शुरूआत की गई है।

महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद चारधाम मंदिर के समीप आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा चरणपादुका एक रथ में स्थापित कर प्रदेश की 2175 किमी. की यात्रा पर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक अदभुत बात है कि बद्रीनाथ मन्दिर में केरल के नंबुरिपाद ब्राह्मण पुजारी हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंग की कल्पना भी शंकराचार्यजी ने की।

दुनिया के सामने आज जितने संकट हैं, उन सबका समाधान अद्वैत वेदान्त में है। शंकराचार्य सर्वज्ञ थे। ओंकारेश्वर में गुरू से ज्ञान प्राप्त कर वे भारत भ्रमण पर निकल गये और स्थान-स्थान पर शास्त्रार्थ कर अपनी विद्वता स्थापित की। वे सभी रूढिय़ों को समाप्त करने वाले सन्यासी थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अद्वैत वेदान्त का प्रचार-प्रसार जन-जन में होना चाहिये। आज की पीढ़ी उनको भूलती जा रही है।

एकात्म यात्रा में अद्वैत वेदान्त का प्रचार-प्रसार तो होगा ही, माता, बहनों, बेटियों का सम्मान करने की शिक्षा भी दी जायेगी। इसके पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, स्वामी परमात्मानन्द सरस्वती, स्वामी विश्वेरानन्द, सन्त रामेश्वरदासजी, स्वामी अतुलेश्वरानन्द सरस्वती एवं अन्य गणमान्य सन्तों द्वारा आदिशंकराचार्य के चित्र के संमुख दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इसके बाद पादुका पूजन किया एवं एकात्म यात्रा का ध्वज यात्रा के लिये सौंपा गया। कार्यक्रम में सभी सन्तों की ओर से स्वामी परमात्मानन्द एवं स्वामी विश्वेरानन्द द्वारा मुख्यमंत्री को रूद्राक्ष की माला पहनाकर आशीर्वाद दिया गया।

आचार्य परिषद के सचिव सन्त परमात्मानन्द सरस्वतीजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति वेद पर आधारित है और निरन्तर है। विश्व में कई संस्कृतियां खड़ी हुईं और नष्ट हो गईं लेकिन भारतीय संस्कृति आज भी जीवित है। हमें इस संस्कृति का संवद्र्धन कर इसकी रक्षा करना होगी।

हिन्दू धर्म ऐसा धर्म और संस्कृति है जो सर्वग्राही है। द्वैत होने पर भी अद्वैत का दर्शन कराने वाली हमारी संस्कृति है।  कार्यक्रम में सन्त विश्वेश्वरानन्दजी ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अदभुत कार्य किया। वे सैकड़ों वर्ष पूर्व दक्षिण में जन्मे और ओंकारेश्वर में आकर उन्होंने सन्यास ग्रहण किया। तत्कालीन समय में हमारा देश विभक्त हो रहा था, उसको जोडऩे का काम उन्होंने किया।

आदिशंकराचार्य की देन हमारे देश के तीर्थ हैं। जब हम बद्रीनाथ और रामेश्वरम जाते हैं तो उन्हें स्मरण करते हैं। एकात्म यात्रा के उज्जैन प्रखण्ड के प्रभारी राघवेन्द्र गौतम ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि नर्मदा यात्रा के समय जब नर्मदा यात्रा ओंकारेश्वर पहुंची थीए तब सन्तों के आग्रह पर आदिशंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित करने का विचार उपजा था।

सरकार व समाज मिलकर शंकराचार्यजी की मूर्ति की स्थापना करेंगे। इससे ओंकारेश्वर को एक नई पहचान मिलेगी।  ओंकारेश्वर में 108 फ ीट ऊंची शंकराचार्य जी की मूर्ति की स्थापना होगी. और इसके लिये धातु संग्रहण करने हेतु एकात्म यात्रा निकाली जा रही है। एकात्म यात्रा उज्जैन के साथ-साथ तीन अन्य स्थानों से आज ही प्रारम्भ हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान की हवाई पट्टी पर अगवानीमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंगलवार को पूर्वाह्न 11.30 बजे उज्जैन पहुंचे। उज्जैन पहुंचने पर दताना हवाई पट्टी पर जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उनका स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री के साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह भी थीं।

इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री  पारस जैन, महापौर श्रीमती मीना जोनवाल, विधायक बहादुरसिंह चौहान, मुकेश पण्ड्या, इकबालसिंह गांधी, श्याम बंसल, बाबूलाल जैन, संभागायुक्त एमबी ओझा, एडीजी व्ही. मधुकुमार, कलेक्टर संकेत भोंडवे, पुलिस अधीक्षक सचिन अतुलकर सहित गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

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