jasoos-sनई दिल्ली, 22 फरवरी. दिल्ली. कार्पोरेट जासूसी कांड में फंसे पेट्रोलियम मंत्रालय के टाइपिस्ट को एक एनर्जी कंपनी ने 20 गुना ज्यादा सैलरी पर रखा था. यह टाइपिस्ट सुभाष चंद्रा हैं. चंद्रा 2011 तक पेट्रोलियम मंत्रालय में 8,000 रुपये माहवार के वेतन पर टाइपिस्ट का काम करता था. वह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी के पीए के तौर पर तैनात था. 2011 में उसने टाइपिस्ट की नौकरी छोड़कर जुबिलैंट एनर्जी में बतौर सीनियर एग्जियुटिव ज्वाइन किया था. यहां उसे 8,000 से सीधे 1.5 लाख रुपये की सैलरी पर रखा गया था.

एक और ग्रुप धराया

क्राइम ब्रांच को एक दूसरे ग्रुप के बारे में भी जानकारी मिली है. यह ग्रुप लोकेश का है, जो पेट्रोलियम मंत्रालय में ही चपरासी के पद पर तैनात है. पुलिस लोकेश से पूछताछ कर रही है.

पांच संस्थान निशाने पर
पुलिस को शुरुआती जांच में पता चला है कि शांतनु सैकिया और प्रयास जैन पांच बड़ी कंपनियों के अधिकारियों को खुफिया दस्तावेज बेचते थे.

शांतनु पर शिकंजा
क्राइम ब्रांच उर्वरक, पावर सेक्टर, सोलर एनर्जी और पर्तो कैमिकल्स में भी शांतनु सैंकिया की भूमिका की जांच कर रही है. पुलिस शांतनु के स्टाफ से भी उनके बारे में बातचीत कर रही है.

Related Posts: