DPS_New photoभोपाल, 16 मार्च. स्वराज संस्थान सभागार में धर्मपाल शोधपीठ एवं गांधी विद्या संस्थानए वाराणसी के संयुक्त आयोजन में हुई गोष्ठी में तुफैल चतुर्वेदी एवं प्रो. कुसुमलता केडिया ने आज के विश्व की परिस्थितियों का विस्तार से विश्लेषण किया और बताया कि संसार का परिवेश आतंकवाद के विरुद्ध है और उस पर नियंत्रण कठिन कार्य नहीं है.

भारत में नेतृत्व के स्तर पर राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण आतंकवाद को वैचारिक पोषण मिलता रहा है. अब सही नेतृत्व सामने है, इसलिए अतंकवाद के परोक्ष समर्थकों को परेशानी हो रही है. संगोष्ठी का विषय था. आतंकवाद का नियंत्रण एवं वैश्विक परिस्थितियाँ कार्यक्रम की अध्यक्षता शोधपीठ के निदेशक प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज ने की.

विषय-प्रवेश करते हुए धर्म-दर्शनों की तुलनात्मक अध्येता वाराणसी की प्रो. कुसुमलता केडिया ने विस्तार से बतलाया कि मध्ययुगीन ईसाइयत एवं उग्रवादी इस्लाम की टकराहटों ने 11वीं शती ईस्वी से आतंकवाद को जन्म दिया था, जिसमें भिन्न मत वालों का सामूहिक वध, उनके घरों-गांवों को जिंदा जला देना आदि की प्रवृत्तियाँ थीं. परन्तु बाद में सभ्य संसार के सम्पर्क में आने पर यूरोप पूरी तरह बदल गया .

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