मुंबई,

आयातकर्ता की ओर से गुणवत्ता के नियमों में कठोरता के कारण भारत फल-सब्जी बाजार में लगातार अपनी उपस्थिति खोता जा रहा है।

सरकारी स्वामित्व वाले कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल अप्रैल-अक्टूबर के दौरान भारत का सब्जी निर्यात 26.3 प्रतिशत तक घटकर 14.4 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 19.5 लाख टन था।

चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में भारत का फल निर्यात भी 17 फीसदी घटकर 3,21,220 टन रह गया, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 3,86,063 टन था। भारत के फलों और सब्जियों के निर्यात में गिरावट से चिंतित एपीडा के चेयरमैन डीके सिंह ने एपीडा से पंजीकृत उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक निर्यात प्रोत्साहन रणनीति तैयार की है।

इस रणनीति में व्यापार से संबंधित विषयों के मद्देनजर क्षमता निर्माण, उपयुक्त ब्रांडिंग, बुनियादी ढांचा विकास, निकास पर खेप के खराब प्रबंधन और प्रशिक्षित मानव-शक्ति में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

सिंह ने कहा कि चूंकि हवाई माल ढुलाई की लागत काफी अधिक होती है और इसका निर्यात लागत पर सीधा असर पड़ता है, इसलिए एपीडा समुद्र के जरिये खेप भेजने के लिए विकसित समुद्री वैज्ञानिक प्रक्रिया के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के साथ भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान और केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान जैसे संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव रख रही है।

इससे ढुलाई की लागत में कमी और निर्यात में सुधार की संभावना है। इसके अलावा, व्यापार और भारतीय मिशनों के साथ परामर्श करके एपीडा ने लक्षित देशों में विभिन्न संभावित और उभरते बाजारों में प्रोत्साहन कार्यक्रमों की योजना का प्रस्ताव भी रखा है। साथ ही, लक्षित देशों में क्रेता-विक्रेता की नियमित रूप से बैठकें आयोजित करने की भी जरूरत है।

सरकारी मानदंडों में लगातार बदलाव को भारत के फलों और सब्जियों के निर्यात में इस गिरावट का जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। यही वजह है कि भारतीय निर्यात को सक्षम बनाने के लिए विशेषज्ञ दीर्घकालिक निर्यात रणनीति तैयार करने के लिए सरकारी नीतियों में स्थिरता की मांग करते हैं। इस बीच, विश्व के सभी बड़े और छोटे देशों ने यूरोपीय संघ द्वारा निर्धारित कड़े गुणवत्ता मानकों को अपनाना शुरू कर दिया है।

इसने भारत के फलों और सब्जियों के निर्यात को मुश्किल बना दिया है। भारत की विख्यात सूचना प्रौद्योगिकी के अलावा व्यापक कृषि-जलवायु क्षेत्र, भौगोलिक स्थिति, कृषि उत्पादन के लंबे इतिहास और व्यापक श्रेणी के उत्पादों की खूबियों के आधार पर भारत में विश्व के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का आउटसोर्सिंग गंतव्य बनने की क्षमता है।

भारतीय किसान आयात करने वाले देशों द्वारा निर्दिष्ट कीटनाशकों की न्यूनतम अवशेष सीमा के अनुसार निर्यात योग्य जिंसों की गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान दे रहे हैं। कनाडा ने अगस्त में भारतीय फलों और सब्जियों के लिए अपना बाजार खोला था। इसने अब भारत से निर्यात किए जाने वाले अंगूर के लिए निरीक्षण दर में कमी कर दी है।

वाहन क्षेत्र की दिग्गज महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की सहायक कंपनी महिंद्रा एग्रो सॉल्युशंस लि. के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अशोक शर्मा ने कहा कि कड़े वैश्विक गुणवत्ता मानदंडों की वजह से हमारी मात्रा पर असर नहीं पड़ा है।

दरअसल, हम 2018 के सीजन में कनाडा को अपने निर्यात में छह गुना वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। हम निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले उत्पाद विकसित करने के लिए किसानों के साथ मिलकर काफी नजदीकी से काम कर रहे हैं।

बाजार की आवश्यकताओं के साथ-साथ ग्राहक वरीयताओं के संबंध में हमारी गहरी समझ हमें पिछले साल के मुकाबले इस साल ऐसी ही वृद्धि हासिल करने के योग्य बनाती है और हमें उम्मीद है कि यह अगले सीजनों में भी जारी रहेगा।
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