nepalकाठमांडो. भूकंप से तबाह हुए नेपाल में मलबे के ढेर के नीचे जीवित लोगों के दबे होने की आशंका के बीच बचावकर्मी जी-जान से तलाश और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं जबकि सुदूर इलाकों में भारी बारिश के कारण मानवीय मदद के वैश्विक प्रयासों में बाधाएं आ रही हैं. इस भूकंप में अब तक पांच हजार से भी ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

भूकंप के बाद राहत पहुंचाने के प्रयास जारी हैं लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि उन्हें देश में मदद प्राप्त करने और फिर उसे देश के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले बेहद जरुरतमंद लोगों तक पहुंचाने में समस्याओं का सामना करना पड रहा है. भूकंप के केंद्र के आसपास के सुदूर पहाडी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण बचाव एवं राहत दलों को बाधाएं पेश आईं.

बचावकर्मी गोरखा, धाडिंग, सिंधुपालचोक, कावरे और नुवाकोट समेत विभिन्न जिलों के उन गांवों में अब तक नहीं पहुंच पाए हैं, जो इस भूकंप में सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. नेपाली दंगा पुलिस को भूकंप में जीवित बचे लोगों के गुस्से पर काबू पाने के लिए कडी मशक्कत करनी पडी. भूकंप के कारण विस्थापित हुए लोगों को खुले आकाश के नीचे ही ठहरने के लिए विवश होना पडा क्योंकि उनके मकान या तो टूट गए हैं या लगभग टूटने के कगार पर हैं. भारत समेत विभिन्न देशों के राहत दल राहत प्रयासों में सहयोग कर रहे हैं. प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के उनके प्रयासों के बावजूद प्रशासन के बीच समन्वय के अभाव के कारण राहत कार्यों में बाधाएं पैदा हो रही हैं. इसके अलावा खराब मौसम और भौगोलिक बाधाओं की वजह से समस्या और गहरा रही है. भूकंप के कारण मरने वालों की आधिकारिक संख्या 5,057 बताई गई थी और प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने कहा कि यह संख्या 10 हजार तक पहुंच सकती है. लेकिन देश के देहात क्षेत्र में तबाही और मरने वालों की संख्या अभी तक पूरी तरह पता नहीं चल पाई है. आठ हजार से ज्यादा लोग भूकंप के कारण घायल हुए हैं. जबकि संयुक्त राष्ट्र का आकलन है कि बीते 80 सालों में नेपाल में आए इस सबसे भीषण भूकंप में 80 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. ेपाल में कई गांव अभी भी बचाव एवं राहत दलों का इंतजार कर रहे हैं, वहीं राजधानी काठमांडो में जीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है. नगर निगम के कर्मचारियों ने आज सडकों की सफाई शुरु कर दी.