इन्दौर,  आम बजट में किए गए प्रावधानों के बाद सिले-सिलाये कपड़ा उद्योग से जुड़े भागीदार इनके दामों में बढ़ोतरी होने की बात कर रहे है। माना जा रहा है कि बजट में तैयार कपड़ों पर लगाए गए दो प्रतिशत के उत्पाद शुल्क से इनकी कीमतों में कम से कम 5-6 प्रतिशत का इजाफा होगा।

वित्त मंत्री ने 1,000 रुपये से ज्यादा कीमत वाले ब्रांडेड कपड़ों पर दो प्रतिशत शुल्क की घोषणा की थी। हालांकि इस कदम से न सिर्फ कपड़ों की कीमतों में तुरंत पांच प्रतिशत का इजाफा होगा, बल्कि घरेलू कपड़ों की खुदरा बिक्री करने वालों को लेखा-जोखा रखने में भी दिक्कतें पैदा होंगी। जीएसटी की तैयारी में एक साल के लिए उत्पाद शुल्क देने की परेशानी पहले ही पैदा की जा चुकी है।

अनुमानित रूप में संगठित रेडिेमेड उद्योग करीब 150,000 करोड़ रुपये का है, जबकि असंगठित उद्योग 300,000 करोड़ रुपये का। इस तरह संपूर्ण तैयार कपड़ा उद्योग का मूल्य 450,000 करोड़ रहता है।

कारोबारियों का कहना है कि खुदरा की लागत, विपणन, वितरकों व खुदरा विक्रेताओं के मार्जिन से कीमतों में 5-6 प्रतिशत तक का इजाफा होगा। 1,000 रुपये और इससे ज्यादा के तैयार कपड़ों पर दो प्रतिशत के उत्पाद शुल्क से कुल संगठित ब्रांडेड कपड़ों का 50 प्रतिशत खुदरा बाजार प्रभावित होगा। दूसरी ओर 1,000 रुपये और ज्यादा के खुदरा मूल्य वाले वस्त्रों का हिस्सा असंगठित बाजार समेत कुल तैयार कपड़ा उद्योग का 30 प्रतिशत रहता है।

अब कपड़ा फैलाने की तैयारी – यूरोप और अमेरिका में प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में देरी हो रही है, इसलिए कपड़ा मंत्रालय ऑस्ट्रेलिया, रूस एवं स्वतंत्र राष्टï्रकुल और अफ्रीका जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते कर निर्यात बढ़ाने के बारे में विचार कर रहा है। मंत्रालय ने अगले 10 वर्षों में कपड़े का निर्यात वर्तमान स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य रखा है, जिसके बाद यह योजना बनाई जा रही है।

चेन्नई में कल इंडिया इंटरनैशनल हैंडवूवन फेयर (आईआईएचएफ) के उद्घाटन के दौरान कपड़ा सचिव रश्मि वर्मा ने बताया कि कपड़ा मंत्रालय ने अगले 10 वर्षों में कपड़ा निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन एफटीए न होने, ऋण उपलब्धता, पुराने श्रम कानून जैसी चुनौतियों के कारण भारत प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ रहा है। वर्ष 2015-16 के लिए कपड़ा निर्यात का लक्ष्य 47.5 अरब डॉलर तय किया गया था, लेकिन दिसंबर तक करीब 32 अरब डॉलर का निर्यात हो पाया है।

वर्मा ने कहा, च्हम लक्ष्य से थोड़ा पीछे रह सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर हम यह इसे हासिल कर लेंगे।ज् केेंंद्रीय विकास आयुक्त (हथकरघा) आलोक कुमार ने कहा कि पिछले साल कपड़ा निर्यात करीब 42 अरब डॉलर का रहा था, जिसमें ज्यादातर हिस्सा रूई और धागे का था। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक माहौल चुनौतीपूर्ण है। वर्मा ने कहा कि भारत का अमेरिका और यूरोपीय संघ से एफटीए नहीं है, जिससे हमारा यह क्षेत्र बांग्लादेश और वियतनाम से प्रतिस्पर्धा में मात खा रहा है।