mp2उज्जैन,   मंगलनाथ क्षेत्र में स्थित महामण्डलेश्वर श्री गंगादास बापू का कैम्प इन दिनो कई कारणो से चर्चा में बना हुआ है. यहां प्रतिदिन प्रात: 8.30 बजे से रामकथा हो रही है. कथा बाल संत श्री प्रियांशु जी महाराज कर रहे है. मात्र 12 वर्ष की आयु में वे 152 कथा कर चुके है. सिंहस्थ में उनकी यह 153 वीं कथा है. खास बात यह है कि प्रियांशु जी ने अब तक स्कूल का मुंह नहीं देखा है.

लेकिन रामचरित मानस, गीता, भागवत, पुराण पर वे लगातार प्रवचन दे रहे है. वे इसके लिये अंखलेश्वर भरूच गुजरात में रामकुंड तीर्थधाम में विराजित हंसमुख हनुमान जी की कृपा और गुरू का आशीर्वाद मानते है.

बाल संत से बताया कि साढ़े 5 वर्ष की उम्र से कथा कर रहे है. पहली राम कथा हरिद्वार में की थी. तब से आज तक सिलसिला जारी है.

25 अगस्त 2002 को वृंदावन में जन्मे प्रियांशु जी का रंग रूप, वेशभूषा वंृदावन की लगती है लेकिन कथा में हिन्दी, गुजराती भाषा का उपयोग कर सभी को मंत्रमुग्ध कर देते है. बाल संत होने के कारण उनका श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण है. महिलाएं, बच्चे व बढ़े उनकी कथाओं में बड़ी संख्या में आते है.

बचपन में आवाज चली गई थी -बाल संत प्रियांशु जी का बिना कही पढ़े ज्ञान प्राप्त होना और सुंदर तरीके से व्याख्यान करना अचंभित करता है.

आश्चर्यजनक बात यह है कि बाल संत की करीब चार वर्ष की उम्र में आवाज चली गई थी। तब इलाहबाद कुंभ में प्रियांशी जी के परिवार की मुलाकात महामण्डलेश्वर श्री गंगादास बापू जी से हुई. उन्होंने प्रियांशु जी को परिवार सहित अपने आश्रम बुलाया. वहां हंसमुख हनुमान जी के दर्शन, पूजन के बाद एक दिन अचानक चमत्कार हुआ और प्रियांशु की आवाज आ गई. आपने बताया कि उनका परिवार का नाम विवेक था जिसे गुरूजी ने बदलकर प्रियांशु रख दिया.

धर्म- आध्यात्म में रूचि
प्रियांशुजी ने कहां कि मेरी हनुमान जी की आराधना में गहरी रूचि थी. बचपन में सुंदर काण्ड कंठस्थ थी. आवाज लौटी तो कई दिन सुंदरकाण्ड किया. बाद में रामकथा फिर विभिन्न शास्त्रों के प्रति आकर्षण हुआ और प्रर्वचन देने लगे.वर्तमान में माता-पिता सहित परिवार के साथ्र गुजरात में ही गुरूजी के आश्रम में रहते है. तीन बहन और दो भाईयों में सबसे छोटे है. अपनी गति को बनाएं रखना चाहते है. उनकी कोई लालसा नहीं है. सभी संतो का आदर करते है. न तो किसी की तरह बड़ा बनना चाहते है न ही कोई अपेक्षा रखते है. उनका कहना है कि भगवान ने मुझे जब आवाज लौटाई है तो अपनी वाणी से भगवान का चरित्र , उनके गुण्गान करना चाहता हूं.

गुरु की मंशा नाम हो
बाल संत के गुरू महामण्डलेश्वर श्री गंगादास बापू ने शिष्य की सफलता पर प्रसन्न्ता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रियांशु जी की कथा सुनकर उन्हें भी अच्छा लगता है. उन्हें उम्मीद है कि एक दिन प्रियांशु का नाम एक अच्छे कथाकारों के रूप में लिया जाएगा.

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