मुंबई. इस साल मॉनसून की बारिश कम रहने के अनुमान से आगामी खरीफ सीजन में कम उत्पादन की आशंकाओं के बीच आज नैशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) पर वायदा कारोबार में ज्यादातर कृषि जिंसों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। सोयाबीन की कीमत 3.23 फीसदी चढ़कर 3,900 रुपये प्रति क्विंटल, चना 2.29 फीसदी चढ़कर 4000 रुपये प्रति क्विंटल और चीनी 1.45 फीसदी उछलकर 2,453 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई।

इसी तरह धनिया 3.07 फीसदी मजबूत होकर 19,544 रुपये प्रति क्विंटल और ग्वार 2.84 फीसदी चढ़कर 4,920 रुपये प्रति क्विंटल पर बिका। हाजिर बाजार में भी कृषि जिसों की कीमतें बढऩे के आसार हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अनुमान में कहा है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून लंबी अवधि के औसत (एलपीए) से कम 93 फीसदी रहेगा, जिसमें 5 फीसदी घटत-बढ़त हो सकती है। रोचक बात यह है कि मौसम विभाग ने तीन संभावनाएं जताई हैं। सामान्य मॉनसून की संभावना 28 फीसदी, सामान्य से कम की 35 फीसदी और अल्प रहने की 33 फीसदी संभावना है। हालांकि मौसम विभाग ने अलनीनो के आशंका खारिज की है।

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, कीमत बढ़ोतरी एक तात्कालिक असर है, जो आगे कम होना शुरू हो सकता है। तार्किक रूप से कमजोर मॉनसून से कम उत्पादन की आशंका के कारण कृषि जिंसों की कीमतें बढऩी चाहिए, लेकिन ऐसा पिछले साल नहीं हुआ, जबकि उस समय बारिश कम रहने का अनुमान जताया गया था। पिछले साल खाद्यान्न के कम उत्पादन के बावजूद इस साल खाद्य महंगाई घटी है। पिछले साल बारिश एलपीए की 88 फीसदी रहने और खरीफ सीजन में खाद्यान्न उत्पादन 3.81 फीसदी घटकर 12.37 करोड़ टन रहने का अनुमान था। लगातार दूसरे साल कमजोर मॉनसून से भारत की सिंचाई व्यवस्था की क्षमता कम हो जाएगी और इससे कृषि उत्पादन और किसान बुरी तरह प्रभावित होंगे। वहीं इस साल मार्च से बेमौसम बारिश का भी कई फसलों पर विपरीत असर पड़ा है।

क्रिसिल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि कमजोर मॉनसून से भारत की अनुमानित 7.9 फीसदी जीडीपी 50 आधार अंक कम हो जाएगी। कमजोर मॉनसून के बहुत से प्रतिकूल असर पड़ेंगे। इससे कृषि उत्पादन घटेगा, जिससे कृषि आय घटेगी और ग्रामीण मांग में कमी आएगी। इसका उद्योग पर असर पड़ेगा, क्योंकि कृषि इनपुट पर उसकी लागत बढ़ जाएगी। सरकार पर जिंसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा और खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ जाएगा।

Related Posts: