मुंबई. दुनिया भर में कमजोर आर्थिक हालात की वजह से वित्त वर्ष 2014-15 में भारत से रत्न एवं आभूषणों के निर्यात में 0.43 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। कुल वाणिज्यिक निर्यात में रत्न एवं आभूषण निर्यात की हिस्सेदारी 13 फीसदी की है।

जेम्स ऐंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात हाल में खत्म हुए वित्त वर्ष 2014-15 में 39.89 अरब डॉलर रहा। पिछले साल यह आंकड़ा 40.15 अरब डॉलर पर था। हालांकि रुपये के लिहाज से निर्यात मामूली बढ़कर 2,43,885.81 करोड़ रुपये हो गया जो पिछले साल 2,42,837.07 करोड़ रुपये था।

जीजेईपीसी के चेयरमैन विपुल शाह ने कहा, इस उद्योग ने कई आर्थिक चुनौतियों का सामना किया है जिनमें चीन में आर्थिक मंदी, पश्चिम एशिया में राजनीतिक हलचल और आतंकी हमले, यूरोपीय बाजारों में गिरावट और रूसी रूबल की परेशानी शामिल है। इसका उद्योग पर बुरा असर पड़ा और नकारात्मक रुझान देखने को मिला। हालांकि जीजेपीईसी और उद्योग की दूरदर्शिता ने इस बुरे दौर से जूझने में मदद की। अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात में हिस्सेदारी बेचने को लेकर उठाए गए कदमों से भारत में निर्यात कारोबार को बढ़ाने में मदद मिली।
औद्योगिक संगठन ने के्रता-विके्रता सम्मेलनों के जरिये अमेरिका को निर्यात बढ़ाने के लिए कई आयोजन किए, दुबई में होने वाले कारोबारी मेलों में हिस्सा लिया जो भारत के लिए आभूषण निर्यात के लिहाज से अहम जगह है। अमेरिका में रत्न एवं आभूषण की प्रमुख कंपनियों से लगातार संवाद और बेहतर डिजाइन के रूप में मूल्यवर्धन से उद्योग को काफी फायदा हुआ और उद्योग की स्थिति में सुधार हुआ। उद्योग ने कई मुद्दों का निराकरण करके वैश्विक उपभोक्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ाने की भरपूर कोशिश की। इस बीच कटे हुए और पॉलिशयुक्त हीरों के कुल निर्यात में डॉलर के लिहाज से 5.46 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 24.49 अरब डॉलर से घटकर 23.16 अरब डॉलर रह गया। हालांकि रुपये के लिहाज से कटे हुए और पॉलिश किए हीरों के निर्यात में 4.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जो पिछले साल के 1,48,185.20 करोड़ रुपये से घटकर 1,41,514.28 करोड़ रुपये रह गई।

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