नई दिल्ली. मॉनसूनी बारिश की अच्छी शुरुआत के बावजूद देश में कई खाद्य सामग्रियों की कीमतें आसमान छू रही हैं. कीमतों का बढऩा भले ही थोक विक्रेताओं के लिए अनअपेक्षित वरदान है लेकिन केंद्रीय बैंक और सरकार के लिए यह बहुत बड़ा सिरदर्द है जो इकॉनमी में जान डालने का प्रयास कर रहे हैं.
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन ने ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए इस साल तीन बार ब्याज दरों में कटौती की है लेकिन उन्होंने चेताया है कि अगर बारिश सही से नहीं होने के कारण महंगाई बढ़ी और उनके टारगेट से अधिक हुई तो वह फिर रेट में कटौती नहीं करेंगे.

मुंबई में बॉन्ड और स्टॉक व्यापारी भले ही मौसम की भविष्यवाणी को गौर सुनते हैं लेकिन मार्केट में थोक विक्रेताओं को कोई चिंता नहीं है. औरंगाबाद की एक भीड़भाड़ वाली मार्केट में बैठे थोक विक्रेता शेख शरीफ को मॉनसून का पता लगाने की कोई जरूरत नहीं है. वह कहते हैं कि बारिश की चाहे जो हाल भी हो उनके सामान के दाम तो बढ़ेंगी ही. अगर मॉनसून फेल हुआ तो मूल्यों में और भारी बढ़ोतरी देखने में आएगी.

दालें, सब्जियां और चिकन का भारतीय कन्जयूमर प्राइस इंडेक्स में योगदान 12 फीसदी है. इसका मतलब है कि अधिक मूल्य वृद्धि से आरबीआई को बहुत बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा जिन्होंने इस साल साल देश में महंगाई दर 2 से 6 फीसदी के बीच में रहने का अनुमान जताया है.

इस साल शुरू में जो महंगाई दर थी उसकी तुलना में गिरावट आने के बाद राजन ने ब्याज दरों में कुल 75 पैसे बेसिस पॉइंट की कटौती की.

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