madhuजानी-मानी अभिनेत्री मधु का कहना है कि फिल्मों में वापसी के बाद सफल होना मुश्किल होता है . रोजा, फूल और कांटे और दिलजले जैसी फिल्मों में काम कर चुकी मधु कुछ साल पहले फिल्मों में वापसी करने के बाद वह महज तीन दक्षिण भारतीय फिल्मों से नजर आईं.

मधु का कहना है कि वापसी के बाद अच्छी भूमिकाएं मिलना और सफल होना मुश्किल होता है. मधु ने हिन्दी के अलावा तमिल, तेलुगू, मलयालम व कन्नड़ फिल्मों में भी अभिनय किया है . उन्होंने कहा मैं स्वयं को अब भी एक नायिका के रूप में देखती हूं. नायिका कहने का मतलब फिल्म के मुख्य किरदार से है. एक मध्य उम्र की औरत नायिका क्यों नहीं हो सकती . जो भूमिकाएं आसानी से मिलीं, वो नायक या नायिका की मां की भूमिकाएं हैं. उन्होंने कहा मुझे यकीन है कि श्रीदेवी, माधुरी, जूही और रवीना जैसी मेरी प्रतिद्वंद्वी या मुझसे वरिष्ठ नायिकाओं में से कोई भी मां की भूमिका नहीं निभाना चाहतीं. लेकिन अगर फिल्म का प्रमुख किरदार एक मां है, तो मुझे नहीं लगता कि हममें से किसी को भी उसे करने में कोई दिक्कत होगी. उन्होंने कहा, मेरे दिमाग में कई नकारात्मक विचार चल रहे है कि मैं हमेशा एक अच्छी महिला की ही भूमिका क्यों करूं? इसलिए मैं अब धीरे-धीरे नकारात्मक किरदारों का रुख कर रही हूं, क्योंकि ऐसी भूमिकाएं आपकी अदाकारी में और निखार लाती हैं.