मुंबई. बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसल का बड़ा हिस्सा खराब हो चुका है और अब कमजोर मॉनसून के अनुमान ने आगामी खरीफ सीजन में भी कम उत्पादन की आशंका बढ़ा दी है।

अरसे से मंदी की मार से परेशान ग्वार को मौसम की इसी अटपटी चाल ने निहाल कर दिया है। कम उत्पादन और निर्यात मांग बढऩे के कारण पिछले एक महीने में ग्वार की कीमतें करीब 50 फीसदी बढ़ चुकी हैं। ग्वार कारोबारियों में सटोरियों की बढ़ती सक्रियता तेजी की तरफ इशारा कर रही है।

ग्वार एक बार फिर सटोरिया चाल चलने लगा है। महीने भर पहले तक मांग न होने की बात करने वाले कारोबारी अचानक मांग में तेजी की बात करने लगे हैं। मॉनसून कमजोर रहने का मौसम विभाग का अनुमान सटोरियों के लिए तेजी का प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। गुरुवार को ग्वार गम 12,000 रुपये और ग्वार सीड 5,000 रुपये प्रति क्ंिवटल को पार कर गया। वायदा बाजार में ग्वार गम और ग्वार सीड लगभग सभी अनुबंधों में सर्किट के फंदे में फंसे। एनसीडीईएक्स में ग्वार गम मई 5.77 फीसदी बढ़कर 12,290 रुपये, जून 5.85 फीसदी बढ़कर 12,480 रुपये और जुलाई अनुबंध 5.99 फीसदी चढ़कर 12,560 पर पहुंच गया। हाजिर बाजार में भी ग्वार 12,000 के पार पहुंच गया। एनसीडीईएक्स में ग्वार सीड मई 3.94 फीसदी चढ़कर 5,116 रुपये, जून 5,165 रुपये और जुलाई 5,205 रुपये प्रति क्ंिवटल पर पहुंच गया।

ग्वार में तेजी की वजह मौसम विभाग की भविष्यवाणी और फसल खराब होने के साथ मांग में तेजी बताई जा रही है। ग्वार की कीमतें कम होने से ग्वार गम का निर्यात तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2014-15 में (अप्रैल 2014 से फरवरी 2015) ग्वार गम के निर्यात 21 फीसदी बढ़कर 6.62 लाख टन हुआ है जबकि वित्त वर्ष 2013-14 के 11 महीनों में 5.45 लाख टन ग्वार गम का निर्यात हुआ था। लेकिन ये आंकड़े भ्रम पैदा करते हैं।

बीकानेर उद्योग मंडल के प्रवक्ता पुखराज चोपड़ा कहते हैं कि मौसम विभाग के अनुमान के बाद ग्वार में सटोरिये सक्रिय हो गए हैं और इसीलिए बाजार में भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है, निर्यात मांग बढऩे की गलतबयानी की जा रही है। चोपड़ा के मुताबिक इस समय मांग करीब 700 टन प्रति दिन है जबकि एक साल पहले यह औसतन 1,800 टन हुआ करती थी। दूसरी बात अगर ग्वार गम का निर्यात बढ़ा तो ग्वार की 85 फीसदी मिलें बंद कैसे हो सकती हैं? वह कहते हैं दरअसल यह पूरा खेल ग्वार सटोरियों का है, जिन्होंने पहले कीमतें गिराईं और अब चढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन बढऩे से ग्वार गम की मांग बढ़ी है। अमेरिकी कंपनियां भारत से ग्वार गम का आयात बढ़ा रही हैं।

ग्वार कारोबारी विनीत शर्मा कहते हैं कि अमेरिका के ह्यूस्टन में 2,000 कंंटेनर (37,000 टन) ग्वार गम बिना बिल के पड़ा हुआ है। इसके खरीदार नहीं हैं। दरअसल पहले ऑर्डर आने पर माल बेचा जाता था लेकिन पिछले कुछ सालों से बिना मांग के बड़े कारोबारी अमेरिका ग्वार गम भेज देते हैं और वहीं के कोल्ड स्टोरों में रखते हैं जो सटोरियों की एक बड़ी चाल होती है।

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