प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सदन में अपने ऊपर लगाए गए तमाम आरोपों का एक एक कर करारा जवाब दिया. उन्होंने विपक्ष यानी कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, अन्नाद्रमुक, जनता दल यूनाइटेड आदि तमाम राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए परोक्ष-अपरोक्ष सभी तोहमतों का हिसाब तो किया ही, इसके पहले पूर्व की सरकारों द्वारा किए गए कार्यों पर भी निशाना साधा.

उन्होंने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए
उन्होंने कुछ पुराने किस्सों वाकयों का उदाहरण देते हुए विपक्ष पर जोरदार पलटवार किया. हालांकि, उन्होंने सीधे सीधे किसी का नाम नहीं लिया पर किसी को बख्शा भी नहीं.

उन्होंने यहां तक कह डाला कि कुछ लोगों की समझ में ही बात नहीं आती या फिर देर से आती है पर तब तक गाड़ी दूर निकल चुकी होती है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मैं अभी नया हूं. मुझे आपके अनुभव की जरूरत है. हम सब जनता के प्रतिनिधि यदि मिलजुल कर जनता के लिए कुछ नया सोचें और उसे आपस में स्वस्थ परिचर्चा कर उनके लिए कोई ठोस योजना बनाएं तो जनता उसका लाभ उठा कर खुद आगे बढ़ेगी और इसी के साथ देश भी उन्नति के रास्ते पर और तेजी से बढ़ेगा. लेकिन यहां तो कई लोगों को यही चिंता सताए जा रही है कि मैं इतना तेजी से काम क्यूं कर रहा हॅंू. कहीं यह बात लोगों के दिलों में घर कर गई तो इस बार जितनी सीटें मिली हैं पता नहीं वह भी मिल पाएंगी कि नहीं.

कुछ लोग मंदबुद्धि हैं, वे सिर्फ इस लिए विरोध करते हैं कि वे विपक्ष में हैं, तो उन्हें हर बात का विरोध ही करना है. समझाने पर भी उनके समझ में कुछ नहीं आता है. वे कभी भी कुछ भी बोलने को तैयार रहते हैं. उन्हें छोटे-बड़े, मान-अपमान का भी ध्यान नहीं होता. चलो, हम तो दूसरी पार्टी के ठहरे जब वे अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ लोगों को अपमानित करने से बाज नहीं आते तो भला और किसी का क्या ध्यान रखेंगे. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है उसे कभी झुठलाया/भुलाया नहीं जा सकता. देश को आज भी 27 दिसंबर 2013 की तारीख याद है जब मनमोहन सरकार का अध्यादेश सबके सामने फाड़ दिया गया था. बड़ो का अपमान लोग भले ही भूल जाएं पर देश याद रखता है.

आज हर बात पर यह कहना फैशन सा हो गया है कि यह तो हमारे समय में शुरू हुआ था. अरे भाई रेल भी आप ही ने शुरू कराई थी, बस. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना आदरणीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई जी ने शुरू कराई थी. आपने मनरेगा शुरू की लोगों को सौ दिन के काम की गारंटी दी पर उसका नतीजा क्या रहा. 30-40 दिन पर ही गाड़ी अटक गई. इसलिए सरकार ने उन्हें काम देने के लिए पांच लाख तालाब और कुंएं खुदवाने का निर्णय किया है. किसानों के लिए फसल बीमा योजना शुरू की गई है जो पूरे देश में लागू होगी.

राहुल के कल के इस आरोप पर कि प्रधानमंत्री से सब मंत्री और बीजेपी सांसद डरते हैं और कुछ बोलते नहीं, मोदी ने तत्कालीन सोवियत संघ तानाशाह नेता स्टालिन से जुड़े एक प्रसंग को सुनाते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा. कहा कि स्टालिन के निधन के बाद सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने निकिता खु्रश्चेव एक बार पार्टी की महासभा में स्टालिन को काफी बुरा भला कह रहे थे, जिस पर सभा में बैठे किसी सदस्य ने उनसे सवाल किया कि तब वह कहां थे? इस पर

ख्रुश्चेव ने कहा कौन है यह? और उस व्यक्ति के सामने नहीं आने पर सोवियत नेता ने कहा, मैं वहीं था, जहां आज तुम हो।

मोदी ने इस संदर्भ को कांग्रेस नेतृत्व पर पलटवार करने के लिए इस्तेमाल करते हुए कहा, हम सभी लोग सार्वजनिक जीवन में जवाबदेह हैं और कोई भी हमसे सवाल पूछ सकता है, लेकिन कुछ हैं जिनसे कोई सवाल नहीं पूछ सकता और न पूछने की हिम्मत करता है और जो पूछता है उसका हश्र क्या होता है, मैंने देखा है.
राहुल और सोनिया गांधी पर परोक्ष प्रहार करते हुए उन्होंने कहा, सदन क्यों नहीं
चलने दिया जा रहा? सदन हीनभावना के कारण नहीं चलने दिया जा रहा. संसद में ऐसे और भी होनहार, तेजस्वी सांसद हैं जिन्हें सुनना अपने आप में एक थाती है। लेकिन, कुछ लोग सोचते हैं कि यदि ऐसे होनहार तेजस्वी सदस्य बोलेंगे तो हमारा क्या होगा? मोदी ने इसी क्रम में कहा, ऐसे लोग चाहते हैं कि विपक्ष में कोई
ताकतवर नहीं बन जाए. विपक्ष में कोई होनहार नहीं बनना चाहिए, कोई तेजस्वी नहीं दिखना चाहिए। उनकी प्रतिभा का परिचय देश को नहीं हो पाए, यह हीनभावना है.

उन्होंने कहा कि पिछले दो सत्रों में विपक्ष के ऐसे किसी होनहार सदस्य की बात हमें सुनने को नहीं मिली.

संसद की कार्यवाही में व्यवधान डाले जाने, सदन के ना चलने से सत्ता पक्ष का कम और विपक्ष का ज्यादा नुकसान होता है, जनता के मुद्दे नहीं उठ पाते। अरे भाई

कितनी भी नाराजगी हो, विरोधी विचार हो यह वह मंच है जहां तर्क रखे जाते हैं, तीखे सवाल किए जाते हैं सरकार को जवाब देना होता है, अपना बचाव करना होता है, सफाई देनी होती है। बहस में किसी को बख्शा नहीं जाता और बख्शा जाना भी नहीं चाहिए पर बहस के दौरान गरिमा रखी जाए, साख बनी रहे तो बात अधिक मजबूती से रख पाएंगे. और यह संदेश नरेंद्र मोदी का नहीं है, स्वर्गीय राजीव गांधी का है. इसलिए हमारी सभी जनप्रतिनिधियों से अपील है कि जनहित में देशहित में आओ सब मिलजुल कर काम करें ताकि हमारा देश तेजी से विकास के रास्ते पर चलता रहे, कहीं कोई गतिरोध न आने पाए.