यह साल राज्य में विधानसभा के आम चुनावों का है. ऐसा साल हर बार आंदोलनों व मांगों का भी साल हो जाता है. जैसे हर साल का दिसंबर का महीना शासकीय कर्मचारियों की छुट्टी का होता है जो छुट्टियां बची रहती हैं वहे लेफ्स न हो जाए इसलिए दिसंबर में ले ली जाती है.

चुनाव वर्ष में जहां लोग यह जानते हैं कि उनकी मांगों पर विचार व निर्णय हो जायेगा. वहीं सत्तारूढ़ पार्टी की सरकार लोकप्रियता बढ़ाने के लिये इनकी मांगों पर उदार हो जाती है.

अभी राज्य सचिवालय कर्मचारी संघ अपनी 10 मांगों पर हड़ताल पर उतर आये थे. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें बुलाकर भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों का निराकरण 15 दिन में कर दिया जायेगा. इसके साथ ही कर्मचारियों ने उनकी हड़ताल स्थगित कर दी.

उनकी मांगों में एक खास मांग यह है कि कर्मचारियों की रिटायर होने की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी जाए. सचिवालय भत्तों का रिवीजन किया जाए. चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को प्रोफेशनल टैक्स से मुक्त करने की मांग भी की गयी है.

चपरासियों व जमादारों के पदनाम को बदलने का आग्रह भी किया गया है. सचिवालय से बाहर शासन के ढाई लाख कर्मचारियों ने भी सचिवालयीन कर्मचारियों को उनका समर्थन दिया है. यह हड़ताल तीन दिन चली और इससे शासकीय कामकाज रुक गया था.

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