भोपाल, हम अपने सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण के लिए अभी सचेत नहीं है, इसके लिए हमें रचनात्मक शक्तियों का परिसंघ बनाना होगा.

कला के क्षेत्र में हमें भामाशाह चाहिए ऐसे स्वयंसेवी चाहिए जो कभी खुद को स्वयंभू ना समझे. यह बात प्रदेश के संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव ने प्रणाम मध्य प्रदेश के राज्य स्तरीय सम्मेलन के प्रथम सत्र के उद्घाटन में मुख्य अतिथि के रुप में कही. राज्य संग्रहालय में आयोजित इस समारोह में अध्यक्षता जाने-माने राष्ट्रीय विचारक एवं चिंतक श्रीधर पराड़कर ने की.

सम्मेलन के द्वितीय परिदृश्य सत्र में महानिदेशक सुशासन संस्थान पदम वीर सिंह एवं वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत शामिल हुए. इसके उपरांत छह अन्य सत्रों का आयोजन किया गया एवम अंत में काव्य पाठ से कार्यक्रम संपन्न हुआ.

ये भी हुए शामिल- हस्तशिल्प एवं पर्यटन सत्र में प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक एवं संतोष श्रीवास्तव ने अपने विचार व्यक्त किए. रंगकर्म सत्र में प्रदेश के नाटय विद्यालय के निदेशक संजय उपाध्याय एवं वरिष्ठ अभिनेता आलोक चटर्जी शामिल हुए. चित्रकला सत्र में वरिष्ठ पत्रकार रामभुवन सिंह कुशवाह, लोकरंग सत्र में वंदिता श्रीवास्तव, साहित्य सत्र में वरिष्ठ पत्रकार पलाश सुरजन, काव्य पाठ में जहीर कुरैशी विशेष रूप से मौजूद रहे.

प्रणाम मध्यप्रदेश के संस्थापक राजीव शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीयता को संपुष्ट करने के लिए स्थानीयता को पुष्ट करना होगा उन्होंने कहा कि प्रणाम मध्य प्रदेश पूरी तरह से गैर राजनीतिक संगठन है जो लोक कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में काम कर रहा है.

जो लोकल नहीं वह ग्लोबल नहीं हो सकता

प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृति के संरक्षण के लिए और विरासत को आगे बढ़ाने के लिए बहुत काम करने की जरूरत है उन्होंने कहा कि जो लोकल नहीं हो सकता वह ग्लोबल भी नहीं हो सकता. प्रणाम मध्य प्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस से प्रदेश के अलग-अलग अंचलों के कला एवं संस्कृति के जानकार सामने आएंगे.

विचारक एवं चिंतक श्रीधर पराड़कर ने अपने संबोधन में कहा कि कृति को जब हम संस्कार देते हैं तो यह संस्कृति बनती है उन्होंने कहा कि कला के दो भाग हो गए हैं. जिसे अब हम शहरी और लोकल के रूप में देखते हैं.

 

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