कांग्रेस के 84वें अधिवेशन के राजनैतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि 2019 में सभी समान विचारधारा वाले दलों के साथ सहयोग के लिये व्यवहारिक दृष्टिïकोण अपनाया जायेगा और भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए व्यवहारिक कार्यप्रणाली विकसित की जायेगी.

श्री राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस के पहले अधिवेशन में राहुल गांधी युवा वर्ग के नेता के रूप में सामने आएंगे और पार्टी में ‘वर्ग’ भावना न आए इसके लिए उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्टï किया है कि वे युवा व वरिष्ठ नेताओं के बीच सेतु की भूमिका अदा करेंगे.

पार्टी भविष्य के लिए बीते हुए समय को नहीं भुला सकती. पार्टी में युवाओं की बात होती है लेकिन वरिष्ठ नेताओं के बिना पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती. वे दोनों को जोडक़र और एक साथ लेकर संगठन को नयी दिशा देना चाहते है. कांग्रेस किसी को भी नहीं छोड़ेगी, यह पार्टी सबके लिये है. चुनाव पूर्व गठबंधन समय की मांग है.

अधिवेशन में कुछ बड़े परिवर्तन भी नजर आये. श्री राहुल गांधी सहित सभी नेता मंच पर नहीं बल्कि सामने नीचे बैठे. मंच पर नेताओं के फोटो भी नहीं लगाये गये. पार्टी अधिवेशन को आडम्बर से दूर अधिवेशन में नयी संस्कृति साफ दिख रही थी.

कांग्रेस ने कर्ज माफी का संकल्प लिया. पार्टी ने मांग की है कि अगले आम चुनाव से पहले देश में महिला आरक्षण लागू हो.संसदीय दल की नेता श्रीमती सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस एक दल नहीं बल्कि एक सोच है. एक आंदोलन और जीवन का अंग है.

श्रीमती सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को एक और संज्ञा ‘ड्रामा बाज’ की प्रदान कर दी. उन्हें पहली संज्ञा ‘जुमला बाज’ उन्हीं के पार्टी अध्यक्ष श्री अमित शाह ने दी थी और यह बात ऐसी चिपक गयी है कि अब श्री मोदी की हर बात और घोषणा जुमला लगती है.

गत आम चुनाव में भाजपा और श्री मोदी ने विदेशों में जमा काला धन को मुख्य मुद्दा बनाया था और हिसाब भी दे दिया था कि वह इतना है कि 125 करोड़ देशवासियों में प्रत्येक पर 15 लाख रुपये के बराबर उनके एकाउंट में डालने वाली तादाद में है. लेकिन चुनाव के बाद श्री मोदी ‘मोनी’ हो गये और उनके अध्यक्ष श्री शाह की उसकी तुच्छता ‘एक जुमला’ मात्र कहकर सिद्ध कर दी. श्री मोदी ‘खोदा पहाड़ और निकली चुहिया’ चरितार्थ कर गये.

श्री मोदी जुमलाबाज-ड्रामाबाज के साथ-साथ फार्मूलाबाज भी हो गए हैं. वे अपनी योजनाओं कार्यक्रमों की अंग्रेजी वर्णमाला के किसी एक शब्द से जोड़ फार्मूला बनाते हैं कि ‘ए’ से यह और ‘डी’ से यह आदि-आदि. यह एक सिलसिला बन गया है.

उनके यह फार्मूले केमिस्ट्री के फार्मूले लगने लगे हैं. उनकी शैलियों के कारण जो पदवियां उन्हें मिल रही हैं वे चुनावों में विरोधियों के बड़े काम आयेगी. इस आने वाले चुनाव में अब वे ‘काला धन’ और 15 लाख हर खाते में लाने की बात नहीं कर पायेंगे, लेकिन जो भी कहेंगे उन पर लोग यह जरूर कहेंगे कि ‘जुमला’ है.

अगले चुनाव में सभी दल भाजपा के नेतृत्व में एन.डी.ए. और कांग्रेस नेतृत्व में यू.पी.ए. में शामिल होंगे. कांग्रेस ने खोया बहुत है उसे बहुत कुछ पाने के लिए भागीरथ प्रयास करने होंगे.

लोकसभा में वह मान्यता प्राप्त विरोधी दल नहीं बन पायी. हाल के उपचुनावों में भाजपा की गोरखपुर व फूलपुर की हार से विपक्ष के खेमे में उत्साह है. लेकिन कांग्रेस की हालत यहां जमानत जब्ती की रही. वर्तमान कांग्रेस अधिवेशन एक बड़ी तैयारी के रूप में सामने आया है.

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