श्रीमती सोनिया गांधी के पार्टी अध्यक्ष रहते श्री राहुल गांधी या अन्य किसी का कांग्रेस अध्यक्ष पद पर आना पार्टी में किसी को स्वीकार नहीं होता. वे लगातार 4 टर्म से पार्टी अध्यक्ष है. एक बार श्री जितेंद्र कुमार ने उनके विरुद्ध चुनाव लड़कर पार्टी अध्यक्ष बनना चाहा था. लेकिन वे पार्टी के संगठनात्मक चुनाव में भारी भरकम वोटों से हार गये थे. लेकिन कुछ समय सेें श्रीमती गांधी बीमार चल रही है. अमेरिका में उनका कोई आपरेशन भी हो चुका है. वाराणसी में एक पार्टी रैली में उन्हें चक्कर भी आ गये थे.

वे और पार्टी भी यह चाहती है कि स्वास्थ और जीवन रक्षा को देखते हुए उन्हें अध्यक्ष पद की भारी व्यस्त जिम्मेदारी को कम कर देना चाहिए. इसी परिपेक्ष्य में श्री राहुल गांधी को पार्टी उपाध्यक्ष बनाया गया है. पार्टी में उन्हें अध्यक्ष बनाने का वातावरण भी बन चुका है. लेकिन यह श्रीमती सोनिया गांधी को तय करना था और उन्होंने 14 अक्टूबर को पार्टी के एक समारोह के अवसर पर कह भी दिया कि जल्दी ही श्री राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष बन जायेंगे.

समारोह भूतपूर्व राष्टï्रपति एवं पार्टी के बड़े नेता श्री प्रवण मुखर्जी की संस्मरणात्मक किताब के विमोचन का था. पुस्तक का विमोचन करते हुए भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने बड़ी बेबाकी से कहा कि उन्हें श्रीमती सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनाया. हालांकि उस समय मंत्रिमंडल में श्री प्रणव मुखर्जी उनसे ज्यादा उपयुक्त थै. उनका पूरा जीवन राजनतिक रहा. जबकि श्री सिंह का पार्टी में आना और प्रधानमंत्री बनना एक इत्तेफाक था. योग्यता में भी श्री प्रणव मुखर्जी उनसे कहीं आगे थे और पार्टी के बड़े-बड़े मसले उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता से निपटाये हैं.

श्रीमती गांधी इन बेबाक टिप्पणियों पर मुस्करा के रह गईं. लेकिन उस समयकाल में श्रीमती गांधी का यह फैसला बड़ा ही राजनैतिक सूझबूझ का था. श्री प्रणव मुखर्जी निश्चित ही बहुत योग्य नेता और उत्कृष्ट कोटि के सांसद थे. उन दिनों मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा लालायित और प्रयत्नशील श्री अर्जुन सिंह थे. श्री अर्जुन सिंह ने भी यह बड़ी बेबाकी से कहा था कि एक समय वे प्रधानमंत्री बनने के लिए आतुर थे लेकिन बाद में उन्होंने यह महत्वाकांक्षा छोड़ दी थी.

उस परिवेश में श्रीमती गांधी को श्री प्रणव मुखर्जी को प्रधानमंत्री न बनाना संभवत: आगे चलकर पार्टी में प्रतिद्वंदिता या टकराव की स्थिति में न आ जाए, इस कारण ठीक लगा होगा. क्योंकि जब श्री नरसिम्ह राव प्रधानमंत्री बने थे तब भी श्री अर्जुन सिंह का उनसे टकराव चलता रहा और वे पार्टी छोड़कर श्री एन.डी. तिवारी के साथ एक विद्रोही संगठन ‘तिवारी कांग्रेसÓ बना बैठे थे. बाद में श्री सीताराम केसरी.. के अध्यक्ष समयकाल में श्रीमती सोनिया गांधी के कारण ही वे कांग्रेस में पुन: वापस आ सके थे.

समारोह में प्रणव मुखर्जी ने यह कहा कि वे हिन्दी नहीं बोल सकते संभवत: इसलिये नहीं बने और उन्हें न बन पाने का कोई क्षोभ भी नहीं है. लेकिन यह सही नहीं लगता. कांग्रेस समर्थित अल्पमत सरकार के प्रधानमंत्री श्री देवेगौड़ा हिन्दी बिल्कुल नहीं जानते थे.
श्री मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने का एक लाभ अपने आप हो गया कि सिखों की ब्लू स्टार के कारण गांधी परिवार के प्रति जो कटुता थी वह खत्म हो गई. सिख नेताओं ने यह खुलकर कहा कि श्री मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने से गांधी परिवार के प्रति हमारा विद्वेष खत्म हो गया.

इसी समय पंजाब में गुरुदासपुर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को बहुत जबरदस्त चुनावी पटखनी दी है. यह सीट पिछले दो चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के टिकिट पर फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना जीतते रहे. उनका हाल ही में कैंसर से निधन हो गया. इस उपचुनाव में यह सहानुभूति की लहर भी नहीं बनी और कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने भारतीय जनता पार्टी के स्वर्ण सलारिया को एक लाख 93 हजार 219 वोटों से हरा दिया.

पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने श्री अमरेन्दर सिंह के नेतृत्व में अकाली ओर भाजपा को भारी शिकस्त देकर सत्ता वापस ले ली थी. इनकी हार इतनी करारी थी कि अकाली तीसरे और भाजपा चौथे नंबर पर पहुंच गयी और दूसरे नंबर पर पहली बार ‘आप’ पार्टी  आ गयी.  गुरदासपुर चुनाव गुजरात के चुनाव में भाजपा के विरुद्ध मनोवैज्ञानिक असर जरूर डालेगा.

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