मोदी का राज्यपाल को वापस बुलाओ मिशन

अहमदाबाद, 25 सितंबर. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने महारैली के जरिए पार्टी के अंदर और बाहर के अपने विरोधियों को अपनी ताकत दिखाने का अभियान शुरू कर दिया है। महारैली में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी जहां कांग्रेस को संदेश दे रही थी , वहीं भाषण के दौरान मोदी के तीखे तेवर भी किसी से छुपे नहीं थे। मोदी ने राज्यपाल कमला बेन के खिलाफ खुला हमला बोलकर अपनी मंशा साफ कर दी। खास बात यह कि महारैली में पार्टी का कोई बड़ा नेता मौजूद नहीं था।

अहमदाबाद के वस्त्राल में आयोजित महारैली में मोदी ने कहा हम 2009 से ही राजभवन द्वारा किए जा रहे अन्याय को बर्दाश्त कर रहे हैं। राज्यपाल ऑफिस अपनी गरिमा को बनाए रखने में नाकाम साबित हुआ है। इस रैली में मोदी ने आरोप लगाया कि 2004 में जब यूपीए की सरकार केंद्र में आई थी , तभी से वह मेरी सरकार को गिराने की साजिश में लगी है। उस वक्त यूपीए ने कहा था कि मोदी अब अपना बोरिया-बिस्तर बांध लें क्योंकि केंद्र सरकार राज्य में कभी भी राष्ट्रपति शासन लगा सकती है। गौरतलब है कि राज्यपाल कमला बेनीवाल और मोदी सरकार के बीच पिछले कुछ सालों से खींचतान चल रही है।

आर.ए. मेहता की लोकपाल के रूप में नियुक्ति के बाद तो दोनों के बीच चल रही खींचतान जगजाहिर हो गई। बेनीवाल पिछले तीन सालों में राज्य सरकार द्वारा पास किए गए पांच बिल अब तक लौटा चुकी हैं। कांग्रेस राज्य के लोगों को पिछले 20 साल से लुभाने में नाकाम रही है और सत्ता से बाहर रही है। इसलिए कांग्रेस राज्य में गवर्नर हाउस के जरिए समानांतर सरकार चलाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस पिछले तीन साल से राजभवन को राज्य में समानांतर सरकार चलाने का जरिया बनाए हुए है। गौरतलब है कि गुजरात सरकार पहले ही राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल को वापस बुलाने का संकल्प पास कर चुकी है।

आडवाणी जैसे नेताओं को भी संदेश
माना जा रहा है कि मोदी की यह महारैली पार्टी के अंदर के विरोधियों को भी साफ संकेत दे रही थी। इस महारैली में शामिल होने से आडवाणी पहले ही इनकार कर चुके थे। इसके बाद मोदी ने किसी और बड़े नेता को निमंत्रित नहीं किया। नतीजा यह निकला कि जहां मोदी के उपवास के दौरान पूरी पार्टी उनके साथ खड़ी नजर आ रही थी , वहीं इस बार राष्ट्रीय स्तर का कोई बड़ा नेता नहीं दिखा। मगर , अलग-थलग करार दिए जाने के खतरे के बावजूद मोदी अपनी राह पर आगे बढ़ते दिखे।

उन्होंने पार्टी आलाकमान को भी यह संकेत देने की कोशिश की है कि अगर उनके वोटर साथ हैं तो पार्टी को देर-सबेर उनके सामने झुकना ही होगा।

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