बालाघाट,   देश के प्रमुख राष्टï्रीय पार्कों में बाघों की मौत और उनके शिकार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा हैै. यही हालात रहे तो कान्हा, पेंच और बांधव गढ़,बाघविहीन हो जाएंगे. कान्हा टाइगर रिजर्व का हैै जहां एक नर और एक मादा बाघ के शव मिले हैं . शव क्षत-विक्षत हालत में मिला हैै.
मादा बाघिन के दो शावक जंगल में लापता हो गए हैं जिन्हें वन विभाग सघनता से तलाश कर रहा हैै. ज्ञात हैै कि पिछले कुछ माह के दौरान लगभग एक दर्जन बाघों की मौत हो चुकी हैै. इनमें कुछ बाघों का शिकार किया गया जबकि कुछ बाघों की मौत जहर देने से हुई हैै.

कान्हा के मुक्की परिक्षेत्र के अंतर्गत परसा टोला बीट से 3 किमी अंदर जंगल में बाघिन का शव मिला है. जबकि एक किसान ने उनके दो शावकों को जंगल में भागते देखा हैै. बाघिन का शव खराब हो चुका हैै. कान्हा प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर जेएस चौहान ने बताया कि मादा बाघिन ने चीतल का शिकार किया था और अपने बच्चों के साथ उसे खा रही थी. तभी एक नर बाघ आया और उसने बाघिन पर हमला कर दिया . इस हमले में बच्चों के बचाने के लिए खूनी संघर्ष में बाघिन की मौत हो गई. बाघिन का सिर पूरी तरह क्षति-ग्रस्त हो गया. इस बीच शावक जंगल की ओर भाग निकले. चौहान ने कहा कि बाघ की मौत प्राकृतिक हैै. शव के नाखून,बाल और शरीर के पूरे अंग मिले हैं, लेकिन शव पूरी तरह सड़ चुका हैै.