cardअब इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन करने पर आपको टैक्स छूट मिल सकती है। वित्त मंत्रालय नकदी के लेनदेन को कम करने के लिए ऐसे कई कदम उठाने वाला है जिनसे इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन को बढ़ावा मिले।

बड़ी खरीदारी करते वक्त या फिर पैसों के लेनदेन में अगर आप कैश की बजाय क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या फिर इंटरनेट बैंकिंग का सहारा लेते हैं तो आपको फायदा हो सकता है। सरकार इसके लिए जल्द ही अहम कदम उठाने वाली है। सूत्रों के मुताबिक अगर कोई शख्स अपनी आमदनी के एक तय हिस्से से ज्यादा का खर्च इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन के जरिये करता है तो उसे एक सीमा तक इनकम टैक्स में छूट दी जाएगी। हालांकि ये छूट कितनी दी जाएगी, इसे हर कारोबारी साल में बजट के दौरान तय किया जाएगा।

वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव पर संबंधित मंत्रालयों और रिजर्व बैंक से सलाह मशविरा कर चुका है। और जल्द ही ये प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक इस पर फैसला ले लिया जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक सरकार एक तय रकम से ज्यादा का लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन के जरिये करना जरूरी बना सकती है। इसे बढ़ावा देने के लिए रेल टिकट की ऑनलाइन बुकिंग कराते वक्त या किसी सरकारी विभाग और कंपनी को इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट करने पर सर्विस चार्ज या सरचार्ज से राहत दी जा सकती है। डेबिट कार्ड पर मिलने वाले अलग-अलग मर्चेंट डिस्काउंट रेट को एक समान किया जा सकता है।इलेक्ट्रॉनिक फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर लगने वाले टेलीकॉम सर्विस चार्जेज घटाये जा सकते हैं।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी के तहत सभी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन पर वैट घटाकर 2 फीसदी करने का भी प्रस्ताव है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन में होने वाली गड़बड़ी रोकने के पुख्ता इंतजाम भी किए जाएंगे।
इन सभी प्रस्तावों का मकसद इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना है। साल 2012 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में फिलहाल 87 फीसदी लेनदेन नकद में होता है। सरकार को उम्मीद है कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देकर काले धन पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी।

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