नयी दिल्ली,

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया से जुड़े मनीलांड्रिंग मामले में कार्ति चिदम्बरम को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आज आदेश दिया।

न्यायमूर्ति एस पी गर्ग ने कार्ति के वकील की दलीलें सुनने के बाद सशर्त जमानत का आदेश जारी किया। कार्ति 12 मार्च से न्यायिक हिरासत में थे।

इससे पहले कार्ति के वकील ने यह कहते हुए अपने मुवक्किल को जमानत पर रिहा करने का आग्रह किया कि अब उसे (कार्ति को) जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। न्यायालय ने कार्ति को गवाहों को प्रभावित न करने, देश न छोड़ने और अपने बैंक खाते नहीं बंद करने का निर्देश दिया है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कार्ति को 28 फरवरी को लंदन से लौटते वक्त चेन्नई हवाईअड्डे पर हिरासत में ले लिया था और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। कार्ति को सीबीआई दिल्ली लेकर आई थी। करीब 13 दिनों तक सीबीआई की हिरासत में रखे जाने के बाद कार्ति को गत 12 मार्च को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

कार्ति के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी के स्वामित्व वाली कंपनी आईएनएक्स मीडिया में 350 करोड़ रुपये के निवेश के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से मंजूरी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी और इसके बदले उन्हें साढ़े तीन करोड़ रुपये मिले थे। उस वक्त उनके पिता श्री पी चिदम्बरम केंद्रीय वित्त मंत्री थे।

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