01modi1पेरिस,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित देशों से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने का आह्वान करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में किसी भी समझौते पर पहुंचने का आधार हमारी समानता के सिद्धांत के साथ अलग अलग जिम्मेदारियाें को पूरा करने के प्रति प्रतिबद्धता का होना चाहिये। कॉन्फ्रेस ऑफ पार्टिज (सीओपी 21) को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा “यह केवल ऐतिहासिक जिम्मेदारी का सवाल नहीं है।

विकसित देशों के पास कार्बन उत्सर्जन में कमी करने का अधिक विकल्प है। हम उम्मीद करते हैं कि विकसित देश महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करेंगे और उन्हें हासिल करेंगे क्योंकि उनमें प्रभावों को सहन करने की अधिक गुंजाइश है। ” श्री मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक भारत को सवा अरब लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तेजी से आगे बढ़ना होगा, जिनमें से 30 करोड़ लोगों तक आज भी उर्जा की पहुंच ही नहीं है। उन्होंने कहा “हम 2030 तक 2005 के मुकाबले 35% तक कार्बन उत्सर्जन कम करेंगे।

2030 तक हमारी ऊर्जा जरूरतों का 40 प्रतिशत अक्षय ऊर्जा से पूरी होगा। ” प्रधानमंत्री ने कहा “ हम नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल के जरिए अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे। उद्हारण के तौर पर 2022 तक हम 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन करेंगे। हम 2.5 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड कोे अवशोषित करने के लिए अपने वन क्षेत्र को बढा रहे है। ” उन्होंने कहा कि हम जीश्वाम ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम कर रहे हैं।

जहां भी संभव है हम ईंधन के स्रोतों को बदल रहे हैं और जन परिवहन प्रणाली में भी बदलाव ला रहे हैं। श्री मोदी ने कहा “हमारी प्राचीन मान्यता है कि मानव जाति और पृथ्वी का अटूट रिश्ता है। प्रकृति और इंसान की भलाई को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।” उन्हाेंने कहा “ हम अगले कुछ दिनों में पृथ्वी का भविष्य तय करेंगे। हमें सही मायनों में वैश्विक सहयोग की जरूरत है, हम उम्मीद करते हैं कि विकसित देश इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करेंगे और उसे आगे भी बढ़ाएंगे।” श्री मोदी ने कहा “सभी तक ऊर्जा पहुंच और बेहतर जीवन एक सार्वभौमिक आकांक्षा है जिसके लिये पर्यावरण को स्वच्छ रखना पड़ेगा।”

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