काला धन के मामले में स्थिति के बारे में इतना उलटफेर हो गया है कि सोचा था क्या और क्या हो गया. भारतीय जनता पार्टी और श्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आते और प्रधानमंत्री बनते से राष्टï्र आश्वस्त हो गया था कि अब कतिपय भारतीयों द्वारा विदेशी बैंकों में काले धन के रूप में जमा भारी धनराशि भारतीय अर्थव्यवस्था में ब्लेक से व्हाइट मनी बनकर आ जायेगी.

जब भारतीय जनता पार्टी केंद्र में यू.पी.ए. शासन काल में विपक्ष में थी उस समय उनके नेता विरोधी दल श्री लालकृष्ण आडवानी ने उसे सरकार के विरुद्ध विपक्ष का मुख्य मुद्दा बनाया था. सन् 2009 के लोकसभा चुनावों में श्री आडवानी पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिये आगे किये गये थे. लेकिन पार्टी चुनाव में सत्ता में नहीं आ पायी लेकिन विपक्ष रहते हुए इसे ही अपना मुख्य मुद्दा बनाये रखा.

जब 2013 में पार्टी ने श्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाया तो चुनाव प्रचार में कालाधन के मुद्दे पर इतना ऊंचा बोल गये कि आज उसमें असफल रहने के कारण उतना ही नीचा देख रहे है. उस समय गरज रहे थे आज उनकी बोलती बंद है. श्री मोदी चुनावी सभाओं में यहां तक हांक गये कि उन्हें मालूम है कि देश का कितना धन विदेशों के बैंकों में कतिपय भारतीयों का जमा है.

उन्होंने अंदाज की भाषा में अपना अंदाज दिखाया कि वह इतना है कि देश की पूरी 125 करोड़ लोगों में प्रत्येक व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपये लाने के बराबर है. और यदि वे सत्ता में आये तो 40 दिन के अंदर उस पूरे काले धन को देश में लाकर देश के विकास में लगा देंगे. यह इतना है कि देश में कोई टैक्स लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी और यह कर दिया कि हर जरूरत की चीज पर सर्विस टैक्स बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया जिससे लोगों के निजी आमदनी में यह 14 प्रतिशत कुल मिलाकर 100 प्रतिशत के बराबर हो गया.

जिस गर्जना पूर्ण वादे पर चुनाव जीते, उसी पर मुकर गये और चुप्पी बांध ली. उनके पार्टी के राष्टï्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने काले धन की मोदी गर्जना पर यह कह दिया कि ‘वह महज एक जुमला था, उसे गंभीरता से न लिया जाए.Ó संसदीय प्रजातंत्र के चुनाव में इस तरह के वादे और उनसे मुकर जाना जनता और जनतंत्र से द्रोह व विश्वासघात है.

अब दूसरी तरफ यह खबर आ गयी है कि देश से 51 बिलियन अमेरिकी डालर के बराबर काला धन हर साल बाहर जा रहा है जबकि भारत का सालाना का रक्षा बजट उससे भी कम 50 बिलियन अमेरिकी डालर के बराबर है. काला धन के मामले में भारत दुनिया में चौथे नम्बर पर है. संयोगवश यह स्थिति भी है कि भारत सेना की क्षमता में भी चौथे नंबर का राष्टï्र है.

काला धन के मामले में यू.पी.ए. सरकार के वित्त मंत्री श्री चिदम्बरम जो स्थिति बताते रहे, वही अब मोदी सरकार के वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली बताने लगे. उस समय वे उस सरकार के कथनों को अक्षमता व गलत बताते थे और उन्हीं की कहीं बातों को सच और यथार्थ मानकर दुहरा रहे हैं.

काला धन के अध्ययन रिपोर्ट में यह कहा गया है कि काला धन कर चोरी, अपराध और अवैध कार्यवाहियों से बनता है. कर चोरी होती भी उसी दशा में है जो कराधान बहुत ज्यादा और भारी होता है और निवेश का वातावरण नहीं होता. मोदी सरकार ने सर्विस टैक्स बढ़ाने में अति कर दी है और निवेश के विरुद्ध बैंक दरें अभी भी बहुत ऊंची हैं.

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