काश्मीर के अलगाववादी उनके भारत विरोधी रूप में नये-नये पहलू जोड़ते जा रहे हैं. उनकी सबसे पहले मांग यह रही कि काश्मीर में जनमत संग्रह हो. इसके बाद उनकी यह मांग सतत् बनी हुई है कि वहां से सेनाएं हटा ली जाए और स्पेशल आर्मी पावर्स एक्ट उठा लिया जाए. इसके बाद यू.पी.ए. शासन काल में उन्होंने भारत विरोध रूख को हिंसक रूप दिया कि पुलिस व आर्मी के जवानों पर पत्थर बरसाये जाए और फौरन गलियों में छिप जाए. वहां जो भी अपराध होते उनके बारे में यही कहा जाता कि वह फौज के जवानों ने किया और ‘बन्द’ कराया जाता.

वहां हर प्रदर्शन में ‘आजादी’ की मांग के साथ पाकिस्तान व इस्लामिक स्टेट के झंडे लहराये जाने लगे है. भीड़ को जुटाने के लिये यह ऐलान किया जाता है कि सभी लोगों को जिनमें घरों की महिलाएं भी शामिल होंगी उन्हें प्रदर्शन में शामिल होना है. बाजार व स्कूल वगैरह बंद रखने है. वर्ना उन्हें भी मार दिया जायेगा. इन दिनों एक पहलू यह जोड़ा गया है कि जब भी फौज किसी आतंकी को मार गिरायेगी काश्मीर के अलगाववादी बंद रखेंगे और प्रदर्शन करेंगे.

इन दिनों हिन्दुओं की अमरनाथ यात्रा को लक्ष्य कर हिंसक प्रदर्शन बढ़ा दिये गये है, जिससे हिंसक परिस्थितियों में यात्रा न चल पाये. वहां एक आतंकी बुरहान के मारे जाने के बाद अलगाववादियों ने उसकी आड़ में इतनी स्थिति बिगाड़ी और हिंसा फैलाई कि अमरनाथ यात्रा को रोकना पड़ा. उनका असली इरादा किसी भी तरह अमरनाथ यात्रा को रोकना ही है. जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर जगह-जगह यात्रा रोकी गयी है. पूरी कश्मीर घाटी में कफ्र्यू लगा दिया गया है.

यात्रा के कई वाहनों पर पथराव, हमले किये जा रहे हैं. कई यात्रियों से पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगाने के लिये कहा गया. कई यात्री वाहनों में आग लगा दी गयी. अलगाववादी इस तैयारी से हिंसक आन्दोलन चला रहे हैं कि जब तक अमरनाथ का बर्फानी शिवलिंग पिघलकर खत्म न हो जाए तब तक ऐसी स्थिति बनाये रखी जाए कि यात्रा सम्पन्न ही न हो पाए. यह भी जानकारी मिली है कि उनका इरादा यह है कि हमेशा के लिए ‘अमरनाथ’ की यात्रा बन्द हो जाए. इस साल से उस मंसूबों को प्रारंभ किया गया है.

काश्मीर के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा कि श्रीनगर की मस्जिदों से पाकिस्तान के नारे लगाये जा रहे हैं. पी.डी.ए. के साथ साझा सरकार में शामिल भारतीय जनता पार्टी के दफ्तरों को लक्ष्य कर उन पर हमले किये जा रहे हैं. काश्मीर की स्थिति के मद्देनजर अब इसके प्रतिकार में जम्मू में हिन्दुओं में उद्विग्नता बढ़ रही है और स्थिति बहुत गंभीर हो गयी है.

पिछले विधानसभा चुनाव में काश्मीर घाटी में महबूबा मुफ्ती की पी.डी.पी. और जम्मू में भारतीय जनता पार्टी का बाहुल्य से राज्य की राजनीति का विभाजन हो गया है.  इस समय सरकार व सेनाएं घाटी की स्थिति में निर्णायक कदम उठाने के लिये दृढ़ हो
गयी है.

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