बातचीत बंद करके काश्मीर में आतंकियों के सफाये के लिये जो सिलसिला चल रहा है उसमें दिनोंदिन तेजी और कामयाबी बढ़ती जा रही है.

हाल ही में घाटी के बांदीदोरा… क्षेत्र में लश्करे तैयबा के सरगना जकी लखवी के भतीजे ओबेद सहित 6 आतंकी मार गिरा दिये गये. ये सभी पाकिस्तानी थे. इनके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं. जकी लखवी ही मुंबई हमले का मास्टर माइंड है और पाकिस्तान फौजों की आईएसआई की रहनुमाई में काम करता है.

अब सरकार ने यह नीति अपना रखी है कि आतंकियों का लगातार सफाया किया जाता रहेगा. पाकिस्तान भी अब इस मजबूरी में आ गया है कि भारत उसके साथ इस मसले पर अब आगे कोई बात नहीं करने जा रहा. घाटी के अलगाववादी संगठन हुरियत और लिबरेशन फ्रन्ट आदि को अब फंड भेजना भी मुश्किल हो गया है.

मैदान में फौजें आ डटी हैं और अलगाववादियों को पाकिस्तान से फंड न पहुंच पाये जिसके लिए नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेन्सी (एन.आई.ए.) ने नाकेबंदी कर दी है. फंड लेने के सिलसिले में हुरियत नेता अबूसईद गिलानी सहित उसका परिवार लिप्त पाया गया.

गिलानी नजरबंद और उसके बेटे व दामाद गिरफ्तार किये जा चुके हैं. काश्मीर में कुछ समय पूर्व से फौजों और पुलिस पर पत्थर मारने की घटनाएं बढ़ती जा रही थीं. एन.आई.ए. ने यह पता लगा लिया कि ये पत्थरबाज लगभग सभी वे युवा वर्ग के हैं जो बेरोजगार हैं.

इन्हें और अन्य लोगों को मासिक वेतन व रोजनदारी पर भी वेतन देकर यही काम दिया गया था कि वे फौजों व पुलिस पर पत्थर फेंकें. पाकिस्तान से फंड आना लगभग बंद हो गया है उसी वजह से पत्थरबाजी करने की मजदूरी व नौकरी करने वाले भी कम हो गये. अब उन्हीं जगहों पर घटते रूप में पत्थरबाजी हो रही है जहां फौज व आतंकियों का मुकाबला शुरू होता है.

नेशनल कान्फ्रेंस के सांसद नेता श्री फारुख अब्दुल्ला यह कह जरूर रहे हैं कि काश्मीर समस्या आजादी के साथ सन् 47-48 में ही सामने आ गयी थी और इसे 70 साल हो चुके हैं. वे इसका यही हल सुझा रहे हैं कि इस समय काश्मीर का जितना हिस्सा भारत और पाकिस्तान के पास है उसे ही स्थाई मानकर इस विवाद को हल कर लेना मान लेना चाहिए.

लेकिन प्रश्न यह है कि इसे दोनों पक्ष नहीं मान सकते. पाकिस्तान वहां आतंकी भेजता जा रहा है और बातचीत की बात भी कहता है और भारत उस पर आकर डट गया है कि यह काश्मीर राजनतिक मसला ही नहीं है. यह केवल आतंकी समस्या है और इसे उसी ढंग से निपटाया जायेगा.

 

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