दिल्ली के जे.एन.यू. से कश्मीरी आतंकी अफजल गुरु के नाम पर एक देशद्रोही दौर शुरू हुआ जो आगे बढ़ता हुआ काश्मीर की राजधानी श्रीनगर में केंद्रीय संस्थान एन.आई.टी. तक भारत विरोधी रूप में पहुंचा. जे.एन.यू. में अफजल की बरसी थी, एन.आई.टी. अलगाववादी कश्मीरी छात्रों ने भारत की क्रिकेट में वेस्टइंडीज से हार का जश्न देश विरोधी- देशद्रोही नारे लगाकर मनाया. अन्य देश प्रेमी छात्रों ने भी इसका जबरदस्त प्रतिकार करते हुए दिल्ली तक आ धमके और श्रीनगर से एन.आई.टी. को हटाने की मांग कर रहे हैं. इसके चलते ही कश्मीर में अलगाववादी मुस्लिम छात्रों ने भारतीय सेना के विरुद्ध एक गंभीर अफवाह फैलाकर पूरी घाटी को अशांत कर दिया है.

जबसे महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद सम्हाला है वहां अलगाववादियों के हौसले बुलंद हो गये है. वह स्थिति आती जा रही है. जब केंद्र सरकार को यह तय करना होगा या तो महबूबा सरकार अलगाववादी से सख्ती से निपट रही है या फिर उस सरकार को बर्खास्त कर वहां केंद्र सरकार शासन हाथ में ले ले. मेहबूबा के बयान भी सेना विरोधी होने से अलगाववादी प्रोत्साहित हो रहे है. मेहबूबा की एक मांग यह भी हुई थी कि कश्मीर से सेना को दिया गया स्पेशल पावर्स एक्ट खत्म किया जाए. काश्मीर घाटी में भारत विरोधी स्थिति तो यह है कि वहां का प्रशासन फौज को सौंप दिया जाए.

जिस तरह हिन्दू- मुस्लिम के नाम पर 1947 में भारत का विभाजन पाकिस्तान से हुआ था. उसी तरह मेहबूबा मुफ्ती अमरनाथ यात्रा के लिये श्रीनगर में दी गयी जमीन पर घाटी में इस्लामी सापं्रदायिकता और उसके प्रतिकार में जम्मू में हिन्दू उद्विग्नता का राजनैतिक विभाजन करा चुकी है. उसी का यह परिणाम हुआ कि विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बाहुल्य घाटी ने मेहबूबा मुफ्ती की पीडीपी को और हिंदू बाहुल्य जम्मू ने भारतीय जनता पार्टी को बहुमत देकर वहां राजनैतिक विभाजन कर दिया है. उसी का परिणाम यह हुआ है कि वहां की विधानसभा में भी किसी को बहुमत नहीं मिला और राजनैतिक धुर विरोधी भारतीय जनता पार्टी और पीडीपी को साझा सरकार बनानी पड़ी जो इस समय सत्ता में है.

काश्मीर घाटी में एन.आई.टी. की घटना के बाद हंदवाड़ा में सेना को लक्ष्य करके भारत के विरुद्ध इस्लामी अलगाववाद की बड़ी व भारी साजिश की गयी है और काश्मीर इस समय अशांत किया जा रहा है. एक स्कूल में एक छात्रा के साथ वहीं के एक छात्र ने छेड़छाड़ की. भारत विरोधी छात्रों ने अफवाह फैला दी कि उसे सेना के जवान ने छेड़ा है. इसी पर उग्र भीड़ को इक_ïा कर आर्मी के बंकर पर हमला कर उसमें आग लगा दी. आर्मी ने बचाव में फायरिंग की जिसमें 3 लोग मारे गये और अब इस फायरिंग को लेकर पूरे काश्मीर में ‘बन्दÓ का आयोजन किया गया है. इस पर मुख्यमंत्री मेहबूबा ने यह बयान देकर अलगवावादियों को संरक्षण व बढ़ावा दिया है कि सुरक्षा बलों को अधिक संयम बरतना चाहिए और विरोध प्रदर्शनों से निपटने के दौरान मानव संचालन प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, फायरिंग में मारे गये युवकों के परिवारों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि मासूम लोगों की हत्या की घटनाएं बरदाश्त नहीं की
जा सकतीं.

राष्ट्र हित में तो अब मेहबूबा का यह बयान ही बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए जिसमें आर्मी बंकर पर हमला, आग लगाना महज प्रदर्शन माना गया है और फायरिंग में मारे गये लोगों को ‘मासूम’ कहा गया है. इस बयान के आधार पर भाजपा को साझा सरकार से वापस आ जाना चाहिए और मेहबूबा सरकार को बर्खास्त किया जाए. ऐसी मुख्यमंत्री ही बर्दाश्त नहीं की जा सकती.

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