पांच अगस्त की सुबह लगभग साढ़े सात बजे सीमा सुरक्षा बल के एक वाहन काफिले पर जम्मू-श्रीनगर राष्टï्रीय राजमार्ग पर समरौली स्थान पर आतंकियों ने हमला कर दिया. 2 जवान मारे गये, आठ घायल हुए. जवाबी कार्यवाही में एक आतंकी मारा गया और एक कासिम नाम का हमलावर पकड़ा गया.

मुम्बई हमले में कसाब पकड़ा गया था और उससे यह साबित हो गया था कि उसके साथ के सभी आतंकी जो मारे गये थे पाकिस्तानी थे और वहीं की आई.एस. षड्यंत्र के तहत समुद्री मार्ग से भारत आये थे. कसाब की पूछताछ मेें ही वह जिन्दा सबूत था और पाकिस्तान में हुई पूरी साजिश का उसके बयानों से पता चल गया. अभी समरौली में कासिम पकड़ा गया है तो उससे भी वह कहां का है और पूरी साजिश का पता भी चल सकेगा.

लेकिन इन गवाह सबूतों से क्या हासिल होने वाला है. 1948 के पाक हमले से पहले दिन से आज तक यह उजागर ही है कि वहां मुस्लिम धर्मान्धता में जो कुछ भी घाटी के अंदर और बाहर हो रहा है वह सब पाकिस्तान द्वारा ही किया जा रहा है. हमने कसाब को पकड़कर जो जानकारी और सबूत जुटा लिये हैं वही अब पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एफ.आई.ए.) के डायरेक्टर जनरल रहे तारिक खोसा कह रहे हैं कि पाकिस्तान की सरकार को इस कड़वे सच को मान लेना चाहिए कि मुम्बई में 26/11 के हमलों की साजिश भी पाकिस्तान की सरजमीं पर रची गयी थी. श्री खोसा जो इस मामले में जांचकर्ता रहे हैं, उन्होंने कहा है कि यह हमला न सिर्फ पाकिस्तान से प्रायोजित था बल्कि आतंकियों की ट्रेनिंग भी देश में ही हुई थी. सभी आतंकी पाकिस्तानी थे. हमले की साजिश और अंजाम देने के लिये लाजिस्टिक सेन्टर सिंध में बनाया गया था और मास्टर माइंड करांची में बैठकर आतंकियों को निर्देश दे रहे थे. श्री खोसा की जांच में जो सामने आ रहा है उसे भारत ने कसाब को पकड़ कर पाकिस्तान की पूरी हरकत को दुनिया के सामने उजागर कर दिया था. सभी आतंकियों को यहीं मार गिराया था और एक को जिन्दा पकड़ कर दुनिया के सामने पूरा सच रखा जा चुका है.
श्री खोसा के इस कथन और निष्कर्ष को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता कि सबूतों से पाकिस्तान की गलती सामने आ रही है. भारत इसे कतई उसकी ‘गलतीÓ नहीं मानेगा. जानबूझकर साजिश के तहत किया काम कहीं भी किसी भी परिस्थिति में ‘गलतीÓ नहीं माना जाता वह केवल अपराध होता है. वर्ना हर अपराध गलती हो जायेगा. गलती उसे माना जाता है जो जाने-अनजाने किसी भ्रम या आवेश में तथ्यहीन बात पर हो जाये जिसका बाद में उसे करने वाले को स्वयं भी अहसास हो.

कश्मीर में 1958 से आज तक पाकिस्तान की तरफ से जो भी हो रहा है वह ‘गलतीÓ की परिभाषा में नहीं आता है. क्या अमेरिका के वल्र्ड सेन्टर पर 9/11 को हमला हुआ था उसे ओबामा बिन लादेन की गलती कहा जाए. अमेरिका ने राष्ट्र के विरुद्ध अपराध ही माना और एब्टाबाद में जाकर उसे मार दिया. भारत ने पूरी जांच-पड़ताल और अदालती कार्यवाही पूरी करके कसाब को भी भारतीय दंड विधान की सबसे बड़ी सजा-ए-मौत दिला कर उसे फांसी पर टांग दिया. आतंकी अफजल गुरु को भी संसद पर हमले की साजिश पर मृत्युदंड दे दिया. आतंकी हमले गलती नहीं भारत के विरुद्ध अपराध हैं.

काश्मीर में भारतीय जनता पार्टी से साझा करके जबसे मुफ्ती सरकार बनी है- आतंकी हमले बढ़े हैं और घाटी में मुस्लिम अलगाववादी खुले तौर पर पाकिस्तान व इस्लामिक स्टेट के झंडे लहरा रहे हैं.

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