किसानों को बैंकों या अन्य संस्थाओं द्वारा दिया जाने वाला कर्ज ही एक बड़ी समस्या बन गया. वे कर्ज लेते तो हैं लेकिन चुकाने के मामले में बकायादार (डिफाल्टर) हो जाते हैं.

अक्सर यही कहा जाता है कि प्राकृतिक आपदा में फसलें खराब हो गयीं यह भी तर्क दिया जाता है कि फसलें बम्पर आ जाने से भाव बहुत गिर गये- लागत तक नहीं निकली. ऐसे में सरकार उन्हें बिगड़ी फसल का मुआवजा देती है.

अब यह हर राज्य में सिलसिला चल पड़ा है कि किसानों ने जो कर्ज लिया उसे माफ कर दिया. रिजर्व बैंक और अन्य बैंक सरकार को लगातार सावधान कर रही है कि इससे किसानों को कर्ज लेने और उसे न देने की आदत पड़ जायेगी जो आगे चलकर सरकारों को भी बहुत भारी पड़ेगी और अर्थव्यवस्था चौपट हो जायेगी.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उनकी भावान्तर योजना के समान इस समस्या का भी एक बहुत ही अच्छा ”समाधान योजना” के नाम से ही समाधान निकाला है कि जो किसान कर्ज नहीं चुका पाये हैं वे यदि मूलधन को ही किश्तों में चुका देंगे तो उनसे कोई ब्याज नहीं लिया जायेगा. किसानों को इस योजना का लाभ लेना चाहिए और सरकारों को भी ”कर्ज माफी” का तरीका खत्म कर देना चाहिये.

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