भोपाल/ इंदौर,   अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने पर नाराज किसानों ने पश्चिमी मध्यप्रदेश में आज से अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी. इससे आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा. सोशल मीडिया के जरिये शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 10 दिन तक चलेगा.

प्रदर्शनकारी किसानों ने इंदौर और उज्जैन समेत पश्चिमी मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में दूध लेे जा रहे वाहनों को रोका और दूध के कनस्तर सड़कों पर उलट दिये. उन्होंने अनाज, फल और सब्जियों की आपूर्ति कर रहे वाहनों को भी रोक लिया और इनमें लदा माल सड़क पर बिखेर दिया. किसानों के विरोध प्रदर्शन से इंदौर की देवी अहिल्याबाई फल-सब्जी मंडी और संयोगितागंज अनाज मंडी समेत पश्चिमी मध्यप्रदेश की प्रमुख मंडियों में कारोबार पर बुरा असर पड़ा.

किसानों ने मंडियों के भीतर कारोबारी प्रतिष्ठानों के सामने हंगामा भी किया.
दरअसल प्रदेश की मंडियों में भाव इस तरह गिर गये हैं कि सोयाबीन, तुअर :अरहर: और प्याज उगाने वाले किसान अपनी खेती का लागत मूल्य भी नहीं निकाल पा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि अब तक इस आंदोलन को इंदौर, उज्जैन, देवास, झाबुआ, नीमच और मंदसौर जिलों के किसानों का समर्थन मिल चुका है.

इंदौर में आवक रोक रहे किसानों पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया है.
जबलपुर संभाग में आंदोलन का असर आंशिक रहा और दूध व फल की आवक पर कोई खास असर नहीं पड़ा. भोपाल संभाग में किसानों ने मंडी का बायकाट किया लेकिन भदभदा मंडी पर सब्जियों की आवक हुई जहां से खुदरा व्यापारियों ने माल खरीदा. करोद मंंडी में आवक कम रही और किसान नेताओं ने आपस में आंदोलन की रणनीति तय की.

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