इंदौर. भारतीय किसानों को प्रशिक्षण और नई तकनीक की जानकारी के लिए कृषि रसायन निर्माता कंपनी इंसेक्टिसाइड्स (इंडिया) लि. के तहत आईआईएल फाउंडेशन ने मध्य प्रदेश में राज्यव्यापी किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। फाउंडेशन ने एक लाख किसानों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य रखते हुए किसान जागरूकता अभियान का आगाज सिहोर और उज्जैन से किया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 2500 किसानों को लेकर दो प्रशिक्षण सत्रों से शुरू हुआ। इसमें मूंग की खेती को भी फसल चक्र में शामिल करने पर विशेष जोर दिया है।

सिहोर के श्यामपुर में आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम में जहां 1300 किसानों ने हिस्सा लिया वहीं उज्जैन के बडनगर में आयोजित सत्र में 1200 किसानों ने भागीदारी की। इस प्रशिक्षण सह जागरूकता अभियान का उद्देश्य किसानों को खेती के तौर-तरीकों में सुधार लाने में मदद करना तथा उन्हें प्रभावशाली फसल सुरक्षा समाधानों के बारे में शिक्षित करना है। खेती की सही तकनीकों की बेहतर जानकारी, कृषि रसायनों का बुद्धिमानी से इस्तेमाल और बुआई तथा खरपतवार नियंत्रण की सटीक जानकारी किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जिससे वे फसल उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं। हालांकि भारतीय किसानों में खेती की नवीनतम तकनीकों का पहुंचना बहुत जरूरी है।

इन दोनों सत्रों में आरएके कृषि महाविद्यालय, सिहोर के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) डॉ. के. जे. सिंह ने उचित पद्धति से उचित प्रणाली अपनाने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कृषि रसायनों के समयबद्ध और उचित इस्तेमाल, बोने से पहले बीज में अंकुरण की जांच के महत्व, कीट नियंत्रण तथा स्प्रे करने की सही टेक्नोलॉजी अपनाने के फायदों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों के साथ सोयाबीन की विभिन्न किस्मों की बहुमूल्य जानकारी का भी साझा किया।इस मौके पर किसानों के साथ आईआईएल के उपाध्यक्ष पी. सी. पब्बी, आईआईएल के विकास प्रमुख संजय सिंह, मध्य प्रदेश के क्षेत्रीय प्रबंधक ओ. पी. सोनी ने भी बात की।

आईआईएल के उपाध्यक्ष पी. सी. पब्बी बताते हैं, कृषि भी एक विज्ञान है जिसमें बीज बोने के तौर-तरीके से लेकर फसल सुरक्षा के उपायों का सही इस्तेमाल तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए फसल चक्र का इस्तेमाल करने तक फसल तैयार हो जाने की अवधि के दौरान एक-एक बारीकियों पर ध्यान देना मायने रखता है। आईआईएल फाउंडेशन ने कम समय में ही तैयार होने वाली फसल मूंग की अवधारणा को फसल चक्र में बढ़ावा देने के लिए एक मुहिम भी चलाई है ताकि किसानों को कई गुना मुनाफा मिल सके। फसल चक्र एक प्राचीन पद्धति है जिसे आज भी किसान मिट्टी की खोई उर्वरा शक्ति वापस लाने तथा उर्वरा शक्ति बढ़ाने जैसे कई कारणों से अपनाते चले आ रहे हैं। विकास प्रमुख संजय सिंह ने कहा, प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत विभिन्न विश्वविद्यालयों के कृषि वैज्ञानिक किसानों को खेती का प्रगतिशील प्रशिक्षण देने के लिए आईआईएल फाउंडेशन के साथ मिलकर काम करेंगे और साथ ही उन्हें मिट्टी की उर्वरा शक्ति के बेहतर प्रबंधन तथा कृषि रसायनों के बुद्धिमानी से इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करेंगे।

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