2itc9होशंगाबाद, 2 अगस्त नससे किसान समन्वय समिति की दो दिवसीय संगोष्ठी में कृषि और किसानों की समस्याओं पर 14 प्रांतों के किसान नेता और प्रतिनिधियों ने गुरूकुल मेें दो दिन चर्चा कर 9 बिंदुओं का निचौड़ निकाला हैं. जिसमें भूमि अधिग्रहण बिल को नकारने के साथ ही शासन की किसान विरोधी नीतियों का खुल कर विरोध किया गया. कुछ संगठनों तेा 10 अगस्त केा दिल्ली में जंतर मंतर पर जाकर केंद्र सरकार के विरोध में प्रदर्शन की बात भी कही है.

इस संगोष्ठी में महारास्ट्र, पंजाब, बिहार, उप्र, मप्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पं. बंगाल, गुजरात, दिल्ली, राजस्स्थान, ओडिसा, कर्नाटक सहित अनेक स्थानों से किसान संगठनों के किसान नेता और प्रतिनिधि आए हुए हैं. जिनके द्वारा किसानों की प्रमुख समस्याओं पर चिंतन मंथन किया गया है. किसान परिषद के अध्यक्ष लीलाधर राजपूत एवं समन्वय समिति के संयोजक विवेकानंद माथवे ने संगोष्ठी के दूसरे दिन मीडिया के समक्ष किसान समन्वय के निचौड़ को प्रस्तुत किया जिसमें विश्व व्यापार संगठन की मूल धारणा और उसके सिद्धांतों को नकारा गया है. न्यूनतम समर्थन मूल्य के निर्धारण की प्रक्रिया को अवैधानिक करार दिया गया है.

भूमि अधिग्रहण कानून ओर उसमें किए जा रहे बदलावों का विरोध किया गया है. यह भी तय किया गया कि भूमि की मिल्कियत समुदाय की है सरकार को इसका हस्तातरण करने का अधिकार नहीं है. किसानों के समूह ने भूमि अधिग्रहण बिल को एक स्वर से नकार दिया है. यह तय किया गया कि प्राकृतिक आपदा के समय पूरा मुआवजा दिया जाना चाहिए. कर्ज को ब्याज मुक्त रखा जाए. ओद्यौगिकरण कारीडोर स्मार्ट सिटी की अवधारणा को अस्वीकार किया गया. जल जंगल जमीन, खनिज और जैव विविधता को बाजार के दायरे से बाहर निकाला जाए. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे.

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