budget-16इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं, पीएम मोदी के सपनों के बजट में मिडिल क्लास को नहीं मिली तवज्जो 

नई दिल्ली,   वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बीच विकास की गति में तेजी लाने के उद्देश्य से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुनियादी ढांचे तथा गरीबों, किसानों और युवाओं के लिए झोली खोल दी. लेकिन संसाधन जुटाने के उनके कुछ कदमों से वेतनभोगी कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी है.

जेटली ने सोमवार को संसद में अपना दूसरा पूर्ण बजट पेश करते हुये सुधारों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सड़क, बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को विशेष तवज्जो देते हुये ग्रामीण विकास और किसानों की स्थिति बेहतर बनाने पर ध्यान केन्द्रित किया है. पिछले कई वर्षों से कृषि विकास दर में जारी गिरावट से चिंतित मोदी सरकार ने कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के लिए 35984 करोड़ का आवंटन किया है और सभी सेवाओं पर आधा प्रतिशत कृषि कल्याण उपकर लगाकर संसाधन जुटाने की कवायद की है.

अगले पांच वर्षों में किसानों की आमदनी दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. ग्रामीण विकास का आवंटन बढाकर 87765 करोड़ तथा बुनियादी ढांचे के लिए 2.21 लाख करोड़ का प्रावधान किया है. ग्राम पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए अनुदान के रूप में 2.87 लाख करोड़ की व्यवस्था की गयी है. सेवा कर में सीधे सीधे बढ़ोतरी नहीं की गयी है लेकिन आधी फीसदी कृषि कल्याण उपकर लगाया गया है जिससे यह 14.5 प्रतिशत से बढ़कर 15 फीसदी हो गया है.
उम्मीद के विपरीत जेटली ने व्यक्तिगत आयकर के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया पर छोटे करदाताओं को राहत देने की कोशिश की है लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि से निकासी पर कर लगाया जाना वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बडा झटका है.

जेटली के कर प्रस्तावों से छोटे मकान के अलावा जूता-चप्पल, सेटटॉप बाक्स, हाईब्रीड वाहन और सैनेटरी पैड सस्ते हो जायेंगे जबकि लक्जरी कारों के साथ ही छोटी कारें और एसयूवी, हीरा व सोने के गहने, ब्रांडेड कपड़े, ब्यूटी पॉर्लर की सेवायें महंगी हो जायेंगी. वित्त मंत्री ने नये कर प्रस्तावों से 19 हजार करोड़ से अधिक की राशि जुटाने की व्यवस्था की है.

वित्त मंत्री के बजट पेश करते ही शेयर बाजार पांच सौ अंक से अधिक लुढक गया लेकिन आखिर में कुछ संभलते हुये 150 अंकों से अधिक की गिरावट पर बंद हुआ. उद्योग जगत ने जहां बजट की तारीफ की है वहीं विपक्ष ने इसे दिशाहीन और निराशाजनक बताते हुये इसे अमीर और बड़े उद्यगपतियों को लाभ पहुंचाने वाला बताया. नरेन्द्र मोदी ने बजट को देशवासियों के सपने को साकार करने वाला बताते हुये इसे गांव, गरीब, किसान और युवाओं पर केन्द्रित बताया है.
वित्त मंत्री ने इसे रॉबिनहुड बजट मानने से इंकार करते हुये कहा कि उन्होंने गरीबों किसानों पर ध्यान केन्द्रित जरूर किया है लेकिन इसके लिए अमीरों की जेब पर अधिक भार नहीं डाला है.

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