पाकिस्तान सरकार ने जासूसी के कथित अपराध में पकड़े भारतीय श्री कुलभूषण जाधव की मुलाकात उनकी माँ एवं पत्नी से करा तो दी, लेकिन इसमें मानवीय पक्ष नहीं रखा. उनकी मुलाकात विदेश विभाग के कार्यालय में ग्लास स्क्रीन के आरपार रखी गई.

वे एक-दूसरे को कांच की दीवार से देख तो सके पर प्रत्यक्ष बात नहीं कर पाये. उनके बीच वार्ता इंटरकॉम साउन्ड सिस्टम में रखी गई. कुल मिलाकर यह रहा कि मुलाकात हो भी गई और नहीं भी हुई. महज एक खानापूरी की गई.

सरबजीत सिंह को भी इसी तरह की जासूसी के कथित अपराध में लाहौर से पकड़ा गया था. जब उस पर दोनों देशों के बीच सघन टकराव व द्वेष बढ़ता गया तो पाकिस्तान ने यह बताया कि वह जेल में कैदियों के आपसी झगड़े में मारा गया.

श्री जाधव के बारे में भी यह अनुमान है कि उन्हें कांच की दीवार के पार इसलिए रखा गया होगा कि उन्हें इन 22 महीनों के दौरान मनमाफिक कहलाने के लिये शारीरिक यातनायें दी गयी होंगी और वे सामने न आने पायें इसलिये भी ऐसा किया गया है. या यह भी हो सकता है कि इस्लाम स्क्रीन के पार जो जाधव दिखाये गये वे जाधव न होकर उनका ‘डमी’ बनाकर बिठाया गया था.

मुलाकात के समय पाकिस्तान में भारतीय उच्च आयुक्त कार्यालय में पदस्थ राजनैतिक अधिकारी श्री जे.पी. सिंह भी मौजूद थे लेकिन वे भी एक ग्लास स्क्रीन के पार बिठाये गये थे. वे सिर्फ उन्हें देख सकते थे पर बात नहीं कर सकते थे और न ही उनकी परिवार से हो रही बातें सुन सकते थे.

माँ और पत्नी से श्री जाधव की मुलाकात 40 मिनिट रखी गयी. पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि यह मुलाकात आखिरी नहीं है जिसका आशय यही निकाला जा सकता है कि पाकिस्तान श्री जाधव और उनके परिवार को आगे भी मिलने देगा.

पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि उसने अभी तक भारतीय दूतावास के अधिकारियों को श्री जाधव से मिलने (काउंसलर कॉन्टेक्ट) नहीं दिया है,ै लेकिन इस प्रश्न पर पाकिस्तान की सरकार विचार कर रही है.

श्री जाधव कभी भारतीय नौसेना के अधिकारी रहे हैं और वहां से सेवा समाप्ति पर ईरान में एक कार्गो कम्पनी में काम कर रहे थे. पाकिस्तान के लोगों ने उनका ईरान में अपहरण करके उन्हें पाकिस्तान ले आये और भारत पर दबाव बनाये रखने के लिये श्री जाधव को मोहरा की तरह इस्तेमाल कर रहा है.

जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की फौजी अदालत में उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी की सजा दी गयी. इस मुकदमे में उन्हें भारत की तरफ से वकील करने जैसी कोई भी जरूरी कानूनी प्रक्रिया नहीं देने दी गई. उन पर जासूसी का जो आरोप लगाया गया वह भी फौजी अदालत का मामला नहीं था उसे सिविल कोर्ट में चलाया जाना था.

भारत ने इस सजा के खिलाफ दी हेग स्थित अंतराष्ट्रीय न्यायालय में अपील की और भारत के एडवोकेट श्री हरीश साल्वे से इस मामले की पैरवी कर रहे हैं इसकी सुनवाई के बाद अंतराष्ट्रीय न्यायालय ने फांसी की सजा पर रोक लगा दी है और पाकिस्तान खुद ही इसमें फंस गया.

मामला अंतराष्ट्रीय न्यायालय में सुनवाई में है. पाकिस्तान यदि आगे भी पारिवारिक मुलाकात और काऊन्सलर एप्रोच की सुविधा देता है तो उसे उसमें प्रत्यक्ष मुलाकात का मानवीय पहलू अवश्य रखना चाहिए. इस तरह का यह पहला मामला है जो अंतराष्ट्रीय न्यायालय के समक्ष लाया गया है और इसमें भारत की सजगता सामने आयी है.

श्री जाधव की माँ और पत्नी इस्लामाबाद से मुलाकात के बाद नई दिल्ली आ गई हैं और उनकी मुलाकात भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज से हो गई है. श्रीमती स्वराज बहुत ही सक्रियता से हर मामले की तरह श्री जाधव के मामले पर भी पाकिस्तान पर दबाव बनाये हुए हैं.

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