नयी दिल्ली,

संसद ने पाकिस्तान में गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिए गये भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव  से इस्लामाबाद में सोमवार को हुई मुलाकात के दौरान उनकी मां और पत्नी के साथ वहां के शासकों द्वारा की गई ‘बेइंतहा बदसलूकी’ की कड़ी निंदा की और सरकार से पड़ोसी देश के विरुद्ध कठोर कदम उठाने की आज मांग की।

लोकसभा और राज्यसभा में श्री जाधव के मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान को सुनने के बाद सदस्य पाकिस्तान के इस अत्यंत अशिष्ट व्यवहार को लेकर काफी आक्रोशित हो गए और उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाते हुए सरकार ने पड़ोसी देश के विरुद्ध कड़े कदम उठाने की मांग की।

इस मुलाकात के बारे में श्रीमती स्वराज ने पहले राज्यसभा में विस्तृत बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने जाधव परिवार के साथ पाकिस्तान की यह बदसलूकी मानवाधिकारों का सरासर उल्लंघन है। उनकी इस बात पर सभी सदस्यों ने सहमति जतायी और पाकिस्तान शर्म करो के भी नारे लगाए।

विदेश मंत्री ने लोकसभा में अपने बयान में कहा कि राजनयिक माध्यमों से तय हुई इस मुलाकात को पाकिस्तान भले ही मानवीयता एवं सद्भाव का तकाज़ा बता रहा हो, पर इसमें मानवीयता एवं सद्भाव दोनों ही नहीं थे।

उन्होंने कहा कि यह मुलाकात दोनों देशाें के संबंध में एक कदम आगे बढ़ने का अवसर हो सकता था लेकिन एक मां की अपने बेटे और एक पत्नी की अपने पति से 22 माह बाद होने वाली एक भावभरी मुलाकात के क्षण को पाकिस्तान ने अपने दुष्प्रचार के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान को इस मुलाकात के संबंध में अपनी चिंताओं एवं आपत्तियों को राजनयिक माध्यमों से कल अवगत करा दिया है। भारत अब और मज़बूत तर्कों के साथ अंतरराष्ट्रीय न्यायलय में श्री जाधव को स्थायी राहत दिलाने के लिए प्रयास कर रहा है।

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