pic3नई दिल्ली,  केंद्र सरकार की ओर से देश भर में संचालित केंद्रीय विद्यालयों को उनके बेहतरीन अकैडमिक रिजल्ट के लिए जाना जाता है. यहां तक कि कई बेहद महंगे निजी स्कूलों के मुकाबले भी इनका प्रदर्शन बेहतर रहता है.

देश भर में 1,000 से अधिक केंद्रीय विद्यालय हैं, लेकिन इन स्कूलों को भी अंग्रेजी के मोर्चे पर सीखने की जरूरत पड़ रही है. केंद्रीय विद्यालय संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि केंद्रीय विद्यालय सिर्फ एक मोर्चे पर निजी स्कूलों के मुकाबले पिछड़ रहे हैं, वह है अंग्रेजी में संवाद करने की क्षमता. अब अंग्रेजी में पकड़ मजबूत करने के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन ने अपने स्कूलों के टीचरों को अंग्रेजी बोलने की ट्रेनिंग देने का फैसला लिया है.

केंद्रीय विद्यालय संगठन ने अपनी इस नई योजना की शुरुआत पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर वाराणसी से करने का फैसला लिया है. वाराणसी क्षेत्र के करीब 1500 टीचरों को अंग्रेजी बोलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. इनमें स्कूलों के प्रिसिंपल, वाइस प्रिंसिपल, सीनियर टीचर्स और अन्य ऑफिस स्टाफ भी शामिल हैं. इन लोगों को वर्कशॉप, इंटरऐक्टिव सेशंस और स्पेशल स्टडी मैटिरियल के जरिए अंग्रेजी बोलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

यह पायलट प्रॉजेक्ट जनवरी में शुरू हुआ है और मई 2016 तक यह चलेगा. पायलट प्रॉजेक्ट से जुड़ एक सीनियर अफसर ने बताया, इस मामले में हम पूरी तरह स्पष्ट हैं कि हमारे टीचर्स काफी क्षमतावान हैं और काम के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं. लेकिन आंतरिक आकलन के जरिए हमने यह भी महसूस किया है कि निजी स्कूल कम्युनिकेशन स्किल के मामले में हमसे कहीं आगे हैं.

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