शल विकास के जरिए युवकों को नौकरी की तलाश में भटकने के लिए छोडऩे के बजाय उसे खुद का रोजगार खड़ा करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है. कौशल विकास का काम नया नहीं है. मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार इसे नया तेवर और धार देने का काम किया है. इसके जरिए 2022 तक नए इंडिया के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने का उपक्रम किया जा रहा है. ढाई साल पहले कौशल विकास के लिए अलग से इस नए मंत्रालय का गठन किया गया.

कौशल विकास के काम को अत्याधुनिक रुप दिया जा रहा है. इसके जरिए गांव, पंचायत, प्रखंड, प्रमंडल स्तरों पर अंतर्राष्टï्रीय मानकों पर आधारित प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जा रहे हैं. नए कौशल विकास केंद्र शुरु करने के साथ ही काम को विस्तार देते हुए देश भर चल रहे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के मातहत ले आया गया है. पहले आईटीआई श्रम मंत्रालय के अंतर्गत चल रहा था. यह सब नए इंडिया के निर्माण के दिशा में द्रुत गति से बढऩे के लिए किया जा रहा है. यह सब युवकों को रोजगार सपन्न बनाने की अनिवार्यता का हिस्सा है.

रोजगार सपन्न बनाने के लिए तीन स्तरों पर काम हो रहा है. पहला, स्किल इंडिया. दूसरा, स्टार्ट अप इंडिया. और तीसरा, मेक इन इंडिया. इन तीनों को मकाम हासिल करना आसान नहीं. इसके लिए कौशल संपन्न लोगों के बदौलत मीलों सफर तय करना बाकी है.

हमारे देश में दुनिया की सबसे बड़ी युवाओं की आबादी है. हमारी कुल आबादी के पैंसठ फीसद लोग 35 वर्ष से कम के हैं. इनको टारगेट कर स्किल इंडिया के तहत कौशल विकास का काम किया जाना है. एक अनुमान के मुताबिक इतनी बड़ी आबादी को अगर कौशल से सुज्जित कर दिया जाए तो भारत दुनिया का सबसे दक्ष कार्यबल बन जाएगा. आज रोजगार की तलाश में बाजार में दस लाख युवक आ रहे हैं लेकिन कौशल के अभाव में उनको उचित अवसर नहीं मिल पाता. नियोक्ता इस आधार पर उसकी पात्रता को कम करके आंकता है कि उसके पास उसकी जॉब के अनुरुप जानकारी नहीं है.

प्रधानमंत्री की भारत को रोजगार सपन्न बनाने की भावना के अनुरुप कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री का पदभार संभालने के बाद श्री प्रधान ने एलान किया कि कौशल विकसित करने के मुहिम को तेज किया जाएगा. इसके लिए मंत्रालय की ओर से रोजगार के अनुकूल माहौल बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी. इससे नए मंत्री का आशय संभवत पिछले दिनों प्रधानमंत्री कौशल विकास विकास केंद्रों (पीएकेवीवाई) को चलाने में आ रही दिक्कतों के निदान से संबंधित था.

पीएमकेवीवाई का प्रशिक्षण केंद्र खोलकर स्थानीय स्तर पर कौशल विकास का काम हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में व्यापक स्तर पर शुरु किया जा चुका है. बीते दिनों इन तीन राज्यों में प्रशिक्षण केंद्रों की बाढ़ सी आ जाने के कारण राष्ट्रीय स्किल डेवलपमेंट कॉउन्सिल (एनएसडीसी) को प्रतिकूल निर्णय लेना पड़ा.

मंत्रालय की ओर से यह तय किया गया कि उन तीन राज्यों में पीएमकेवीवाई के किसी भी जॉब के लिए फिलहाल कोई प्रशिक्षण केंद्र शुरु नहीं किया जाएगा. पीएमकेवीवाई के केंद्रों पर केंद्र सरकार की मदद से अठारह वर्ष से ज्यादा उम्र के गैरनियमित पढ़ाई करने वाले बेरोजगारों को विभिन्न ट्रेड में मुफ्त कौशल प्रशिक्षण देने की सुविधा है.

दरअसल, कौशल विकास केंद्रों से निकलने वाले युवा नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय उद्यमिता के लिए भी प्रेरित होते हैं. रोजगार प्राप्ति की दिशा में कौशल विकास परियोजनाओं की सफलता इतिहास रच सकती हैं. किसी भी विकसित देश का अवलंब उसके वर्क फोर्स पर निर्भर होता है. भारत में महज दो से तीन फीसदी लोगों का ही वर्क फोर्स है.

जबकि जापान में 15 फीसदी तो चीन में तीस फीसदी लोग वर्क फोर्स बनकर विकास के इंजन को चला रहे हैं. सक्षम राष्ट्र बनने के लिए वर्क फोर्स की तादाद बढ़ाने की जरुरत है. अगर आबादी कौशल संपन्न हो जाती है, तो अधिक आबादी का होना हमारे लिए वरदान बन सकता है.

कौशल विकास के जरिए कम पढे लिखे लोगों में बाजार की मांग के अनुरुप तैयार किया जा सकता है. कौशल एवं उद्यमिता मंत्रालय का लक्ष्य ग्रामीण स्तर पर पहुंचकर युवकों को रोजगार बाजार के लिए तैयार करना है.

आलोक कुमार

 

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